अभयवाणी न्यूज
बालाघाटमहाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने तथा बोधगया टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी एक्ट 1949 को निरस्त करने की मांग को लेकर महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति द्वारा पटना में पांच दिवसीय भूख हड़ताल शुरू की गई। आंदोलन 23 से 27 अगस्त तक प्रस्तावित था, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से बौद्ध अनुयायी शामिल हुए।
👉 मुख्यमंत्री आवास के सामने शुरू हुआ आंदोलन
समिति ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास के सामने भूख हड़ताल शुरू कर सरकार से BTMC एक्ट 1949 निरस्त करने और महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग रखी।
आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समिति के प्रतिनिधिमंडल को अपने आवास पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया।
👉 मुख्यमंत्री से हुई महत्वपूर्ण मुलाकात
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राष्ट्रीय अध्यक्ष भदंत प्रज्ञाशील महाथेरो, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. आकाश लामा, भंते सुनीत पाल थेरो तथा सिक्किम राज्य के समन्वयक लामा ओगदी पिंसो सहित प्रतिनिधिमंडल ने पटना कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को बौद्ध समुदाय को सौंपने तथा BTMC एक्ट 1949 को निरस्त करने की मांग रखी।
👉 मुख्यमंत्री के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि महाबोधि महाविहार बोधगया बौद्ध अनुयायियों का प्रमुख धार्मिक केंद्र है और इस संबंध में सरकार प्राथमिकता से विचार करेगी।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद समिति ने पांच दिवसीय भूख हड़ताल स्थगित कर दी।
👉 1895 से जारी है प्रबंधन की मांग
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समिति के अनुसार, महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग का इतिहास लंबा है। श्रीलंका निवासी बौद्ध मिशनरी अनागारिक धम्मपाल ने वर्ष 1895 में तत्कालीन कलकत्ता न्यायालय में महाविहार के प्रबंधन को बौद्ध अनुयायियों को सौंपने के लिए कानूनी प्रयास शुरू किए थे।
समिति का दावा है कि स्वतंत्रता के बाद भी बौद्ध समुदाय को महाविहार का पूर्ण प्रबंधन नहीं मिला। वर्ष 1949 में बिहार सरकार द्वारा BTMC एक्ट बनाया गया, जिसके तहत समिति में बौद्ध और गैर-बौद्ध सदस्यों के साथ जिला कलेक्टर को पदेन अध्यक्ष बनाए जाने का प्रावधान किया गया।
👉 सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
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BTMC एक्ट 1949 को निरस्त करने और महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर वर्ष 2012 में रिट पिटीशन क्रमांक 380/2012 दायर की गई। इसके समर्थन में वर्ष 2018 में समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता पूज्य भदंत धम्मशिखर जी ने इंटरवेंशन पिटीशन क्रमांक 91048/2018 प्रस्तुत की।
पूज्य भदंत धम्मशिखर जी लगातार सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित पेशियों पर अधिकृत अधिवक्ता के साथ उपस्थित होते रहे हैं।
👉 आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
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समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश प्रभारी तथा सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता पूज्य भदंत धम्मशिखर जी ने कहा कि महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय के हाथों में होना ही आंदोलन का एकमात्र लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय लेकर प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को नहीं सौंपा तो भविष्य में दिल्ली में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन बौद्ध समाज की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ा है।
👉 देशभर से मिला आंदोलन को समर्थन
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समिति के अनुसार आंदोलन को देश के विभिन्न राज्यों से बौद्ध अनुयायियों का समर्थन मिला है। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर भी BTMC एक्ट के खिलाफ आंदोलन किए जा चुके हैं।
महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति से जुड़े मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भी केंद्र और बिहार सरकार से महाविहार का प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग का समर्थन किया है। इनमें भोपाल, बालाघाट, इंदौर, जबलपुर, सिवनी, बैतूल, मंडला, छिंदवाड़ा, ग्वालियर सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हैं।
