जेवनारा पंचायत की जांच में लीपापोती का आरोप

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सिवनी
केवलारी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जेवनारा में पंचायत दर्पण पर दर्ज भुगतानों को लेकर उठे सवालअब जनपद पंचायत स्तर पर की गई जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं की गंभीरता से जांच करने के बजाय मामले को हल्का करने का प्रयास किया गया।       शिकायता कर्ता - टेकन गिरी गोस्वामी
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 दर्पण में दर्ज विभिन्न प्रविष्टियों, बिल-वाउचर और संबंधित लोगों के नामों के आधार पर करीब 4.17 लाख रुपये के भुगतानों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन भुगतानों की प्रक्रिया में कथित कमीशनखोरी तथा भुगतान के बाद राशि वापस लिए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
👉           जांच रिपोर्ट पर ही उठने लगे सवाल
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ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजी जांच से वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकती। यदि पंचायत दर्पण में भुगतान दर्ज हैं तो संबंधित बिल, वाउचर, सामग्री की खरीदी, कार्यस्थल तथा भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए था।
आरोप यह भी है कि जांच के दौरान जिन गंभीर बिंदुओं पर कार्रवाई अपेक्षित थी, उन पर ठोस पड़ताल करने के बजाय जिम्मेदार सरपंच-सचिव को बचाने की कोशिश की गई। इसी वजह से अब केवलारी जनपद पंचायत की जांच प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है।
    👉     कमीशनखोरी और राशि वापसी की चर्चा ने बढ़ाई गंभीरता
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मामले को और गंभीर बनाने वाली बात भुगतान के बाद कथित रूप से राशि का कुछ हिस्सा वापस लिए जाने की चर्चा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि ऐसा हुआ है तो इसकी बैंक लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयानों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सवाल यह भी है कि यदि भुगतान नियमानुसार किए गए थे तो बिल-वाउचर, पंचायत दर्पण की प्रविष्टियों, बैंक भुगतान और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कर स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
      👉      पंचायत दर्पण की प्रविष्टियों से खुल सकता है पूरा मामला
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ग्रामीणों की मांग है कि जेवनारा पंचायत में दर्ज सभी भुगतानों की जांच पंचायत दर्पण से की जाए। प्रत्येक भुगतान की प्रविष्टि के साथ संबंधित बिल-वाउचर, बैंक खाते में हुए भुगतान, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन और भुगतान प्राप्त करने वालों के बयान लिए जाएं।
इन सभी रिकॉर्ड का आपस में मिलान होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत में दर्ज भुगतान के पीछे वास्तविक कार्य हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो उसकी वास्तविक लागत क्या थी।
👉        अब जिला पंचायत की जांच पर टिकी नजर
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मामले में अब निगाहें जिला पंचायत और वरिष्ठ अधिकारियों की ओर हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या केवलारी जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट को अंतिम मानकर प्रकरण बंद कर दिया जाएगा या फिर स्वतंत्र अधिकारियों की टीम गठित कर दोबारा जांच कराई जाएगी।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच पंचायत स्तर के प्रभाव से अलग रखकर कराई जाए और पंचायत दर्पण की सभी प्रविष्टियों, बिल-वाउचर, बैंक लेनदेन तथा जमीनी स्थिति का मिलान कराया जाए।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो प्रशासन को दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी, ताकि संदेह की स्थिति समाप्त हो सके।
फिलहाल जेवनारा पंचायत का मामला केवल कथित भुगतान और अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब केवलारी जनपद पंचायत की जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता भी सवालों के घेरे में है।
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