10 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझती रही मादा बाघ शावक, आखिर कैसे हुई मौत? जांच रिपोर्ट खोलेगी राज!

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बालाघाट
कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में उपचाराधीन मादा बाघ शावक की रविवार को मौत हो गई। शावक को 8 अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव परियोजना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अरौली से रेस्क्यू किया गया था। आबादी क्षेत्र में पहुंचने के दौरान शावक से जुड़ी घटना में एक महिला घायल हो गई थी।
        वन विभाग के अनुसार शावक अकेली और बेहद कमजोर अवस्था में मिली थी। उसे बचाने के लिए वन्यजीव चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में लगातार उपचार किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
  👉     एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम
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मृत्यु के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की निर्धारित एसओपी के तहत पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद अधिकारियों एवं एनटीसीए प्रतिनिधि की मौजूदगी में शवदाह किया गया।                                                   👉         जांच रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
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मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शावक के अंगों एवं जैविक नमूनों को फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच हेतु जबलपुर प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु का स्पष्ट कारण सामने आएगा।
कार्रवाई के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, वन विभाग के अधिकारी, एनटीसीए प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
                      
          अभयवाणी न्यूज पेपर
                       
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