प्रदेश के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की न्यायोचित व लंबित मांगों पर निर्णय कर शीघ्र आदेश जारी करने बाबत ज्ञापन
नरसिंहपुर- करेली
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ द्वारा प्रदेश के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों तथा माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा पूर्व में की गई कर्मचारी हितैषी घोषणाओं के क्रियान्वयन हेतु शासन-प्रशासन को निरंतर ज्ञापनों के माध्यम से अवगत कराया जाता रहा है।
अत्यंत खेद का विषय है कि संघ के बारंबार अनुरोध के उपरांत भी माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं—विशेषकर अधिकारी/कर्मचारियों एवं पेंशनरों हेतु स्वास्थ्य बीमा योजना, कर्मचारी आयोग का गठन तथा दो संतान की बाध्यता समाप्त करने संबंधी आदेश—पर अपेक्षित कार्यवाही अभी तक लंबित है। शासन के इस उदासीन एवं हठधर्मिता पूर्ण रवैये से प्रदेश के सभी संवर्गों के अधिकारी/कर्मचारियों में तीव्र असंतोष व्याप्त है, जो कभी भी व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है।
अतः प्रदेश के शासकीय सेवकों की जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए संघ अपनी 23 सूत्रीय प्रमुख मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत करता है:
पुरानी पेंशन एवं ग्रेच्युटी: प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) वरिष्ठता के साथ पुनः लागू की जाए तथा ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा केंद्र के समान ₹25 लाख की जाए।
सेवा अवधि गणना: शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग में नवीन शैक्षणिक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए।
महंगाई भत्ता: प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान तिथि से देय महंगाई भत्ता (DA/DR) स्वीकृत किया जाए।
लिपिक संवर्ग: लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के समान समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान किया जाए।
संतान संबंधी नियम: सेवा नियमों में दो से अधिक संतान की बाध्यता वाले आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
नियमितीकरण एवं आउटसोर्स व्यवस्था: प्रदेश में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी, संविदा व स्थाई कर्मियों को रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित किया जाए; इसके बाद ही शेष पदों पर सीधी भर्ती हो। विभागाध्यक्षों को नियमितीकरण के अधिकार दिए जाएं। तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के आउटसोर्स कर्मियों को शासकीय सेवक मान्य किया जाए तथा कार्यभारित कर्मचारियों को अवकाश नकदीकरण का लाभ दिया जाए।
स्थाई कर्मी लाभ: स्थाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का पूर्ण लाभ दिया जाए।
पंचायत सचिव संविलियन: समस्त पंचायत सचिवों का विधिवत संविलियन पंचायत विभाग में किया जाए।
स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्ति: नवीन नियुक्तियों में 70%-80%-90% स्टाइपेंड की व्यवस्था को माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर के निर्णयानुसार समाप्त कर पूर्ववर्ती 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि नियम बहाल किए जाएं।
कृषि विस्तार अधिकारी: कृषि विस्तार अधिकारियों की लंबित वेतन विसंगति का निराकरण माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार किया जाए।
शिक्षकों की पदोन्नति: सहायक शिक्षक, उच्च श्रेणी शिक्षक, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों को योग्यता व विषयवार वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए। पदोन्नति में D.El.Ed./B.Ed. की अनिवार्यता के स्थान पर पदोन्नति उपरांत विभागीय प्रशिक्षण का प्रावधान किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग विसंगतियां: स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर की जाए। 31 वर्षों से कार्यरत कुष्ठ कर्मचारियों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता व महंगाई भत्ता मिले तथा नेत्र चिकित्सा सहायकों का पदनाम बदलकर "नेत्र चिकित्सा अधिकारी" किया जाए।
स्वास्थ्य कार्यकर्ता कैडर: बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (MPW) के प्रमोशन पद (स्वास्थ्य सुपरवाइजर) को डाइंग कैडर से बाहर कर पदोन्नति बहाल की जाए एवं ANM को छत्तीसगढ़ राज्य की तर्ज पर बिना अतिरिक्त प्रशिक्षण के पदोन्नति दी जाए।
आयुष विभाग संवर्ग: आयुष संचालनालय द्वारा वर्ष 2002-03 में संविदा नियुक्त कर्मियों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता दी जाए तथा विभाग के समस्त संवर्गों को प्रथम/द्वितीय समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।
महिला एवं बाल विकास: विभाग की संविदा पर्यवेक्षकों का नियमितीकरण किया जाए एवं पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति समाप्त की जाए।
फार्मासिस्ट सेवा नियम: फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना 'फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम 2025' को मध्य प्रदेश में यथावत लागू किया जाए।
वन विभाग पदोन्नति: म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के नियम 6(2) एवं 6(4) के तहत चयन वर्ष 2026 की प्रक्रिया में वनक्षेत्रपाल से सहायक वनसंरक्षक पद हेतु वर्ष 2026 व 2027 की संभावित रिक्तियों तथा प्रतिनियुक्ति पदों को शामिल किया जाए।
पटवारियों के संबंध मे : पटवारियों के प्रमोशन नियम में परिवर्तन कर मध्यप्रदेश शासन के अन्य कर्मचारियों की भांति ही सीनियरिटी के आधार पर प्रमोशन दिया जावे पद रिक्त न होने की स्थिति में उच्च पद का वेतनमान दिया जावे ,समयमान वेतनमान हमेशा अगले पद का दिया जाता है पटवारियों का अगला पद राजस्व निरीक्षक है जिसका वेतन ग्रेड 2800 है जबकि पटवारियों को अगला समयमान 2400ग्रेड पे पर दिया जा रहा है जो कि विसंगति पूर्ण है इसे दूर कर 2016 से प्रथम समयमान 2800 पर फिक्स कर दिया जावे किसी भी योजना के तहत् रजिस्ट्री बनाना पटवारी का काम नहीं है अगर पटवारी से ये करवाना है तो कमसे कम 50000 कीमत के अच्छे मोबाइल प्रिंटर स्केनर और इ साइन भी व सर्व सुविधायुक्त कार्यालय भी पटवारी को उपलब्ध करायें और इस योजना के लिए पृथक से कम से कम 10000 रुपये अतिरिक्त मानदेय भी पटवारी को दिया जाये|
वेतन आयोग गठन: विभिन्न विभागों के संवर्गों की वेतन विसंगतियों के स्थायी निराकरण हेतु राज्य स्तर पर स्वतंत्र वेतन आयोग का गठन किया जाए।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी : सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्र. सी-3-18/1/35 भोपाल दिनांक 31/8/2010 के तहत किये गए प्रावधान अनुसार प्रदेश के समस्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के अक्सर प्रदान किया जावे |
पारिवारिक पेंशन अहर्ता: परिवार पेंशन हेतु पूर्ण सेवा अहर्ता को 33 वर्ष से घटाकर 25 वर्ष किया जाए।
अनुकंपा नियुक्ति सरलीकरण: अनुकंपा नियुक्ति नियमों का सरलीकरण किया जाए। 3 वर्ष में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता के कारण सेवा समाप्ति के आदेश निरस्त कर पूर्व नियमानुसार परीक्षा उपरांत वेतन वृद्धि दी जाए। शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति हेतु पात्रता परीक्षा व प्रशिक्षण की अनिवार्यता समाप्त हो।
परामर्शदात्री समिति: मुख्य सचिव स्तरीय स्थायी परामर्शदात्री समिति की बैठक तत्काल आयोजित की जाए।
अतः संगठन का शासन से पुरजोर आग्रह है कि उपर्युक्त समस्त न्यायोचित मांगों पर समय-सीमा निर्धारित कर सकारात्मक निर्णय लेते हुए तत्काल आदेश जारी किए जाएं, जिससे कर्मचारियों में पनप रहे असंतोष का समय रहते निराकरण हो सके।


