शिक्षा हमें परीक्षा में पास कराती है, लेकिन जीवन में संस्कार ही काम आते हैं- कथावाचक सत्यम मधुरम

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संवाददाता: मनोज शुक्ला

  • ग्राम सियरमऊ में संगीतमय कथा का चतुर्थ दिवस, गोवर्धन पूजा के साथ बाल लीलाओं का हुआ सजीव वर्णन

सिलवानी. रायसेन जिले के सिलवानी तहसील के ग्राम सियरमऊ में चल रही संगीतमय कथा के चतुर्थ दिवस पर कथावाचक सत्यम मधुरम जी के श्रीमुख से ज्ञान और भक्ति की अविरल गंगा बही। कथा के दौरान उन्होंने वर्तमान समाज की सबसे बड़ी चिंता पर बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के बच्चों में उच्च शिक्षा तो है, लेकिन संस्कारों की भारी कमी होती जा रही है।

राम और रावण का दिया सटीक उदाहरण

महाराज जी ने शिक्षा और संस्कार के बीच का गहरा अंतर स्पष्ट करते हुए रावण और भगवान श्रीराम का उदाहरण दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा, "रावण के पास शिक्षा और ज्ञान की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संस्कार न होने के कारण वह अहंकार के वशीभूत हो गया। इसी अहंकार में उसने माता सीता का हरण किया और अंततः उसका सर्वनाश हुआ। वहीं दूसरी तरफ, भगवान श्रीराम के पास शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कार भी थे, इसीलिए आज पूरी दुनिया उनके आदर्शों की पूजा करती है।"

जीवन की परीक्षा में संस्कार ही आते हैं काम

कथावाचक सत्यम मधुरम ने कहा कि स्कूली शिक्षा हमें केवल किताबी परीक्षाओं में पास होना सिखाती है। लेकिन जब हम जीवन की असली और कठिन परीक्षाओं में फेल होने लगते हैं, तब हमारे बुजुर्गों द्वारा दिए गए संस्कार ही हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संस्कारहीन औलाद केवल परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र को हानि पहुंचाती है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सिर्फ डिग्रियां न दिलाएं, बल्कि उन्हें संस्कारवान भी बनाएं।

गोवर्धन पूजा और बाल लीलाओं ने मोहा मन

कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान की मनमोहक बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। इस दौरान गोवर्धन पूजा का भी आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।

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