प्रहलाद गजभिये ( जिला ब्युरो बालाघाट )
खैरलांजी / बालाघाट
खैरलांजी वन परिक्षेत्र में सामने आए कथित नकली हैमर मार्क और ट्रांजिट पास (टीपी) घोटाले की जांच रिपोर्ट ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में कई ऐसी अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनसे स्पष्ट होता है कि नियमों की अनदेखी कर लकड़ी परिवहन की तैयारी की गई। अब विभाग दोषियों की जवाबदेही तय करने और उनके विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित वन कर्मचारियों द्वारा लकड़ी का लोडिंग प्रमाण-पत्र जारी ही नहीं किया गया था। नियमानुसार बिना लोडिंग प्रमाण-पत्र के ऑनलाइन ट्रांजिट पास (टीपी) जारी नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद दो ट्रकों में बड़ी मात्रा में लकड़ी लोड कर परिवहन की तैयारी कर ली गई, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ट्रकों में लदी अधिकांश लकड़ी पर अधिकृत हैमर मार्क नहीं था, जबकि कुछ लकड़ियों पर पुराने हैमर मार्क पाए गए। इसे वन विभाग ने गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है। विभाग तकनीकी स्तर पर भी हैमर मार्क और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
जांच रिपोर्ट के बाद कई अहम सवाल सामने आए हैं। 👉 सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रांजिट पास जारी ही नहीं हुआ था तो लकड़ी ट्रकों में कैसे लोड कर दी गई?
👉 मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
👉 कथित नकली हैमर मार्क किसने लगाया और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं?
साथ ही विभागीय स्तर पर किसकी लापरवाही या मिलीभगत रही, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
टीपी कांड की जांच रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मामले में कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाकर दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करता है।
अभयवाणी समाचार पत्र
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