प्रहलाद गजभिये( जिला ब्युरो बालाघाट)
चरेगांव / बालाघाटमध्यप्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार इन दिनों 'पंचायत दर्पण 2.0' पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण थमती नजर आ रही है। कई दिनों से पोर्टल के सुचारू रूप से काम नहीं करने से पंचायतों में कराए गए निर्माण कार्यों के बिल ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप लाखों रुपये के भुगतान लंबित हैं और ग्राम पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, सीसी रोड, पुलिया, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। इन कार्यों में उपयोग हुई सीमेंट, सरिया, गिट्टी, ईंट, रेत तथा अन्य निर्माण सामग्री का भुगतान पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जाता है। लेकिन पोर्टल लगातार ठप रहने के कारण भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई है।
स्थिति यह है कि पंचायतें न तो सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के बिल दर्ज कर पा रही हैं और न ही मजदूरों की मजदूरी का भुगतान हो पा रहा है। इससे पंचायतों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों में भी भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने पंचायतों के भरोसे लाखों रुपये की निर्माण सामग्री उधार में उपलब्ध कराई थी, लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिलने से अब आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
👉 व्यापारियों ने दी चेतावनी
स्थानीय व्यापारियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द ही लंबित भुगतान नहीं हुआ तो पंचायतों को उधार में निर्माण सामग्री देना बंद कर देंगे। उनका कहना है कि बिना भुगतान के लगातार सामग्री उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में गांवों के विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
👉 मजदूर भी परेशान
पोर्टल बंद होने का असर मजदूरों पर भी पड़ा है। कई पंचायतों में काम पूरा होने के बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं हो सका है। मजदूरों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें समय पर मजदूरी मिलना आवश्यक है, लेकिन भुगतान अटकने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
👉 अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जनपद पंचायत और संबंधित अधिकारी पोर्टल की समस्या से पूरी तरह अवगत हैं, तब भी इसे शीघ्र ठीक कराने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। तकनीकी खामी का खामियाजा पंचायतों, व्यापारियों और मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।
👉 जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पंचायत दर्पण पोर्टल को तत्काल सुचारू कराया जाए, लंबित बिलों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य ठप हो जाएंगे और शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
फिलहाल पंचायत दर्पण पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण पूरे पंचायत तंत्र में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कब तक कर पाते हैं, ताकि विकास कार्यों की रफ्तार दोबारा पटरी पर लौट सके।
अभयवाणी समाचार पत्र
बालाघाट
