प्रहलाद गजभिये( जिला ब्युरो बालाघाट )
रामपायली/ बालाघाट जनप्रतिनिधियों की विधायक निधि और सांसद निधि से वर्षों पहले यात्रियों की सुविधा के उद्देश्य से बनाए गए यात्री प्रतीक्षालय आज बदहाली का शिकार होकर अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं। वारासिवनी से मोवाड़ मार्ग के प्रमुख ग्राम रामपायली सहित कई स्थानों पर बने प्रतीक्षालय जर्जर अवस्था में हैं। कहीं दीवारें टूट रही हैं, कहीं छत क्षतिग्रस्त है तो कहीं गंदगी और अतिक्रमण ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन प्रतीक्षालयों के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन निर्माण के बाद इनके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप यात्री खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। बरसात और गर्मी के मौसम में महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली विद्यार्थियों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रवासियों के अनुसार कई प्रतीक्षालयों में बैठने की व्यवस्था पूरी तरह खराब हो चुकी है। स्वच्छ पेयजल, शौचालय और नियमित सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कुछ स्थानों पर प्रतीक्षालयों का उपयोग असामाजिक तत्वों द्वारा किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जिससे आम यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक परिसंपत्तियों का नियमित रखरखाव भी उतना ही आवश्यक है। यदि समय-समय पर मरम्मत और साफ-सफाई कराई जाती तो आज ये प्रतीक्षालय यात्रियों के लिए उपयोगी साबित होते।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि पंचायत, जनपद पंचायत, नगर परिषद और संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से ऐसे सार्वजनिक परिसंपत्तियों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन करना चाहिए। जहां मरम्मत की आवश्यकता हो वहां तत्काल कार्य कराया जाए तथा रखरखाव के लिए वार्षिक बजट निर्धारित किया जाए। साथ ही अतिक्रमण हटाने, नियमित सफाई और जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
👉 जनता का सीधा सवाल 👈
क्षेत्र की जनता पूछ रही है कि जब करोड़ों रुपये की सार्वजनिक निधि से यात्री प्रतीक्षालय बनाए गए थे, तो उनकी वर्तमान बदहाल स्थिति का जिम्मेदार कौन है? क्या संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इन परिसंपत्तियों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे, या फिर ये भवन इसी तरह उपेक्षा का शिकार बने रहेंगे?
👉 अभयवाणी की राय 👈
यात्री प्रतीक्षालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा से जुड़ी सार्वजनिक संपत्ति हैं। यदि इन्हें विधायक या सांसद निधि से लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया है, तो इनका नियमित रखरखाव भी उतनी ही गंभीरता से होना चाहिए। निर्माण के बाद उपेक्षा किसी भी विकास कार्य के उद्देश्य को कमजोर कर देती है।
अभयवाणी का मानना है कि संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिम्मेदार विभाग संयुक्त रूप से सभी यात्री प्रतीक्षालयों का सर्वे कराएं, जर्जर भवनों की शीघ्र मरम्मत कराएं, नियमित सफाई और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें। जनप्रतिनिधियों को भी समय-समय पर निरीक्षण कर जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी चाहिए।
जनता के कर से निर्मित सुविधाएं जनता के ही काम आएं—यही सुशासन और विकास की वास्तविक पहचान है।
अभयवाणी समाचार पत्र
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