बहुचर्चित सरकारी चावल हेराफेरी मामले में एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे करोड़ों रुपये के इस घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एथेनॉल प्लांट के लिए 111 ट्रकों की 183 ट्रिप के माध्यम से करीब 17 हजार मीट्रिक टन चावल जारी किया गया था, लेकिन इनमें से 5459 मीट्रिक टन चावल प्लांट तक पहुंचा ही नहीं। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक 17 आरोपियों को नामजद किया जा चुका है। इनमें 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 5 आरोपी अभी भी फरार हैं। कई अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले दिनों में बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
एसआईटी को संदेह है कि गायब हुआ चावल अन्य राज्यों में खपाया गया। इसी कड़ी में महाराष्ट्र की दो और छत्तीसगढ़ की एक राइस मिल जांच के दायरे में आई है। जांच टीम चालान, तौल पर्चियां, भंडारण रिकॉर्ड, बिजली खपत और मिलिंग डेटा सहित विभिन्न दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड की मांग कर सकती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल चावल हेराफेरी का मामला नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस बहुचर्चित घोटाले में शामिल लोगों पर शिकंजा कसता जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क और वास्तविक जिम्मेदारों का खुलासा होने की उम्मीद है।
