प्रहलाद गजभिये ( जिला ब्युरो बालाघाट)
किरनापुर/बालाघाटआदिवासी अंचल के विकास के सरकारी दावों के बीच किरनापुर विकासखंड की बककर ग्राम पंचायत के वनग्राम बोंदलझोला में पिछले 15 वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्र एक कच्ची झोपड़ी में संचालित हो रहा है।
बारिश शुरू होते ही झोपड़ी की छत टपकने लगती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार केंद्र में 16 से 20 बच्चे पंजीकृत हैं। बरसात के दिनों में झोपड़ी में पानी भर जाने से कई बार केंद्र बंद करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2011 से निजी झोपड़ी में ही केंद्र संचालित हो रहा है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भवन निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है। बारिश के दौरान सड़क कीचड़ से भर जाती है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पेयजल, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रही है।
