सिवनी जिले की जनपद पंचायत केवलारी अंतर्गत उप तहसील उगली क्षेत्र की बागडोंगरी, नसीपुर और हिर्री नदी एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि बरसात शुरू होने से पहले जिला प्रशासन एवं खनिज विभाग के अधिकारी इन नदी घाटों का संयुक्त निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि रेत उत्खनन स्वीकृत सीमा के भीतर हुआ है या उससे अधिक।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित नदी घाटों से निर्धारित मात्रा से अधिक रेत का उत्खनन किया गया है, जिससे नदियों के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि समय रहते जांच नहीं हुई तो बारिश के मौसम में नदी तटों के कटाव और आसपास के क्षेत्रों में नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि रेत खदान संचालन की शर्तों के तहत पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण अनिवार्य होने के बावजूद संबंधित ठेकेदार द्वारा अब तक पौधारोपण नहीं किया गया। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन इसकी जांच कर ठेकेदार से जवाब-तलब करे तथा खनन स्वीकृति की शर्तों और उनके पालन की स्थिति सार्वजनिक करे।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग, राजस्व विभाग और तकनीकी अमले की संयुक्त टीम द्वारा स्थल निरीक्षण कराया जाए, ताकि यह पता चल सके कि उत्खनन स्वीकृत सीमा के भीतर हुआ है या नहीं। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि नदियां केवल रेत का स्रोत नहीं बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा हैं। इनसे भूजल स्तर, कृषि व्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन जुड़ा हुआ है। इसलिए रेत उत्खनन की निगरानी और पर्यावरणीय नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
इस संबंध में संबंधित खनिज विभाग एवं रेत ठेकेदार का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। क्षेत्र के लोगों को अब प्रशासनिक जांच और वास्तविक स्थिति सार्वजनिक होने का इंतजार है।
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