कुछ साल पहले तक इस गाँव में पानी के लिए संघर्ष आम बात थी। विशेषकर महिलाओं को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इस चुनौती से निपटने के लिए 2 दिसंबर 2020 को नल-जल योजना की शुरुआत हुई, जिसके लिए 75.21 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से योजना ने गति पकड़ी और लगभग ढाई वर्षों की मेहनत के बाद 2 अगस्त 2023 को यह कार्य पूर्ण हुआ। पूरे गाँव में पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया।
योजना की खास बात सिर्फ जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि पानी की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। गाँव की महिलाओं को FTK (फील्ड टेस्ट किट) के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया, जिससे वे स्वयं पानी में pH, क्लोराइड, आयरन और फ्लोराइड जैसे तत्वों की जांच कर सकें। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी अहम साबित हुई है।
15 दिसंबर 2023 को योजना का संचालन ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया। अब पंचायत ही इसके रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही है, जिससे इसकी निरंतरता सुनिश्चित हो रही है।
आज शंकरपिपरिया के सभी 494 घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है। इससे महिलाओं को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, समय और श्रम की बचत हुई है और जलजनित बीमारियों में भी कमी आई है।
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