बालाघाट
जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत जिले के समस्त विद्यालयों में 8 से 14 अप्रैल तक डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं संत रविदास जयंती उत्सव पूरे उत्साह, उमंग और गरिमा के साथ मनाया जा रहा है।बालाघाट जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत जिले के समस्त विद्यालयों में 8 से 14 अप्रैल तक डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं संत रविदास जयंती उत्सव पूरे उत्साह, उमंग और गरिमा के साथ मनाया जा रहा है। इस सप्ताह भर चलने वाले आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान विभूतियों के जीवन, विचारों और उनके द्वारा स्थापित सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है।सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती शकुंतला डामोर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक समरसता, समानता, शिक्षा के महत्व और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों, आश्रम शालाओं एवं कन्या शिक्षा परिसरों में विविध गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों को डॉ. भीमराव आंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण तथा भारतीय संविधान निर्माण में उनके योगदान के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। शिक्षकगण विद्यार्थियों को उनके विचारों—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—से प्रेरित कर रहे हैं। इसके साथ ही वाद-विवाद, भाषण, निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को भी विकसित किया जा रहा है।
इसी क्रम में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बैहर के विद्यार्थियों द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन पर आधारित आकर्षक चित्रकला (पेंटिंग) तैयार की गई। इन चित्रों में उनके जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों—शिक्षा प्राप्ति, सामाजिक संघर्ष और संविधान निर्माण—को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इससे न केवल विद्यार्थियों की कला प्रतिभा सामने आई, बल्कि अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिली।
वहीं संत रविदास जयंती के अवसर पर माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर, परसवाड़ा में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। छात्राओं द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता, लोकनृत्य, गीत एवं नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें संत रविदास के जीवन, उनके सरल स्वभाव, समता के संदेश और सामाजिक भेदभाव के विरोध को प्रभावी रूप से दर्शाया गया। नाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज में सभी मनुष्य समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव अनुचित है।
कार्यक्रमों के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं संत रविदास के आदर्शों—समानता, शिक्षा, भाईचारा, मानवता एवं सामाजिक न्याय—के महत्व को विस्तार से समझाया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि इन महान व्यक्तित्वों के विचार आज भी समाज को दिशा देने में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
इसके अलावा विद्यालयों में प्रभात फेरियां, विचार गोष्ठियां, प्रेरक कथाओं का वाचन, पोस्टर निर्माण एवं समूह चर्चा जैसी गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।इस सप्ताह भर चलने वाले आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान विभूतियों के जीवन, विचारों और उनके द्वारा स्थापित सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है।सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती शकुंतला डामोर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस उत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक समरसता, समानता, शिक्षा के महत्व और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों, आश्रम शालाओं एवं कन्या शिक्षा परिसरों में विविध गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों को डॉ. भीमराव आंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण तथा भारतीय संविधान निर्माण में उनके योगदान के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। शिक्षकगण विद्यार्थियों को उनके विचारों—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—से प्रेरित कर रहे हैं। इसके साथ ही वाद-विवाद, भाषण, निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को भी विकसित किया जा रहा है।
इसी क्रम में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय बैहर के विद्यार्थियों द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन पर आधारित आकर्षक चित्रकला (पेंटिंग) तैयार की गई। इन चित्रों में उनके जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों—शिक्षा प्राप्ति, सामाजिक संघर्ष और संविधान निर्माण—को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इससे न केवल विद्यार्थियों की कला प्रतिभा सामने आई, बल्कि अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिली।
वहीं संत रविदास जयंती के अवसर पर माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर, परसवाड़ा में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। छात्राओं द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता, लोकनृत्य, गीत एवं नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें संत रविदास के जीवन, उनके सरल स्वभाव, समता के संदेश और सामाजिक भेदभाव के विरोध को प्रभावी रूप से दर्शाया गया। नाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज में सभी मनुष्य समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव अनुचित है।
कार्यक्रमों के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं संत रविदास के आदर्शों—समानता, शिक्षा, भाईचारा, मानवता एवं सामाजिक न्याय—के महत्व को विस्तार से समझाया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि इन महान व्यक्तित्वों के विचार आज भी समाज को दिशा देने में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
इसके अलावा विद्यालयों में प्रभात फेरियां, विचार गोष्ठियां, प्रेरक कथाओं का वाचन, पोस्टर निर्माण एवं समूह चर्चा जैसी गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।
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