संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को सिलवानी में आयोजित सकल हिंदू समाज का विशाल हिंदू सम्मेलन और शोभायात्रा आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता का प्रभावशाली दृश्य बनकर सामने आई। कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस आयोजन में हजारों की संख्या में सनातनी नागरिकों ने भाग लेकर धर्म रक्षा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सार्वजनिक रूप से दोहराया। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती शोभायात्रा भगवा ध्वजों, “जय श्रीराम” के उद्घोष और अखाड़ों के शौर्य प्रदर्शन से पूरे वातावरण को ऊर्जावान बनाती हुई हाई स्कूल मैदान पहुंची, जहां यह विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। कार्यक्रम के दौरान गायत्री परिवार द्वारा समरसता यज्ञ, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को वैचारिक व आध्यात्मिक गहराई दी। मंच से संतों और वक्ताओं ने हिंदू एकता, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को संगठित करने और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी, संत समाज और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन समरसता भोज के साथ हुआ, जिसने सामाजिक एकता का व्यवहारिक संदेश दिया।
केके रिपोर्टर आपसे पूछता है:
क्या ऐसे आयोजन समाज में स्थायी एकता और समरसता पैदा कर पा रहे हैं?
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