आवेदक ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में आवासीय भूमि का पट्टा प्रदान दिए जाने संबंध में ग्राम पंचायत सिकन्द्रा में आवेदन प्रस्तुत किया गया था, किन्तु ग्राम पंचायत की ओर से कोई राहत प्रदान नहीं की गई।
आवेदन के अनुसार, शिकायत के आधार पर न्यायालय श्रीमान तहसीलदार महोदय वारासिवनी द्वारा वर्ष 1959 की धारा 248 के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए आवेदक के निवास स्थान को तोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप आवेदक वर्तमान में अपने परिवार सहित खुले आसमान के नीचे रहने को विवश है।
जितेन्द्र ने अनुविभागीय अधिकारी वारासिवनी से झोपड़ा निर्माण हेतु उपयुक्त भूमि प्रदान किये जाने की मांग की है।
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