समय पर उपचार से बची सर्पदंश पीड़ित की जान, प्रशासन ने अंधविश्वास छोड़ अस्पताल पहुंचने की दी सलाह।

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      प्रहलाद गजभिये ( जिला ब्युरो बालाघाट)
बालाघाट
बैहर विकासखंड के ग्राम मंडवा में समय पर मिले चिकित्सकीय उपचार से सर्पदंश पीड़ित पवन सोनवानेकी जान बच गई। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना ही सबसे प्रभावी और जीवनरक्षक उपाय है।
जानकारी के अनुसार 25 जुलाई की शाम करीब 6 बजे ग्राम मंडवा निवासी पवन सोनवाने को विषैले कोबरा सांप ने तीन से चार स्थानों पर डंस लिया। सर्पदंश के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। परिजनों और ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिठली पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. सौरभ उइके एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीज को तुरंत एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) देकर प्राथमिक उपचार किया। हालत स्थिर होने पर उन्हें जिला चिकित्सालय बालाघाट रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार के बाद उनकी स्थिति सामान्य हो गई। वर्तमान में पवन सोनवाने पूरी तरह खतरे से बाहर हैं।
प्रशासन के अनुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैहर अर्पित गुप्ता के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियानों का सकारात्मक प्रभाव क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। अब लोग सर्पदंश के मामलों में अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय सीधे शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में पहुंच रहे हैं, जिससे समय पर उपचार मिल रहा है और कई लोगों की जान बचाई जा रही है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की किसी भी घटना में झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के चक्कर में समय बर्बाद न करें। मरीज को तुरंत निकटतम शासकीय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। जिला चिकित्सालय सहित प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार ही मरीज की जान बचाने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी माध्यम है।
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"सर्पदंश में अंधविश्वास नहीं, समय पर उपचार ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। पवन सोनवाने का मामला इस बात का सशक्त उदाहरण है कि झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचने से एक अनमोल जीवन बचाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाना और वैज्ञानिक सोच को अपनाना समय की आवश्यकता है। सर्पदंश की हर घटना में 'गोल्डन आवर' का सही उपयोग करें, क्योंकि समय पर मिला उपचार ही जीवन और मृत्यु के बीच सबसे बड़ा अंतर साबित होता है।"
           अभयवाणी समाचार पत्र
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