सरकारी चावल घोटाला- छोटे आरोपियों पर कार्रवाई, 'मास्टरमाइंड' अब भी जांच के दायरे से बाहर?

बालाघाट
 सरकारी चावल हेराफेरी मामले में जांच और कार्रवाई आगे बढ़ रही है, लेकिन अब तक की प्रगति कई सवाल भी खड़े कर रही है। पुलिस और एसआईटी ने अब तक 17 ट्रकों को जब्त किया है तथा कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, फिर भी मामले के कथित मुख्य सूत्रधारों तक जांच नहीं पहुंचने को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों के पास डिजिटल साक्ष्य और परिवहन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आई हैं। इसके बावजूद अब तक कार्रवाई मुख्य रूप से ट्रक चालकों, ट्रांसपोर्टरों और निचले स्तर के आरोपियों तक सीमित दिखाई दे रही है।
जांच के दौरान एसआईटी ने प्लांट प्रतिनिधि राहुल प्रताप, सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव तथा ट्रांसपोर्टर उबैद खान को न्यायालय में पेश किया, जहां से उनकी रिमांड बढ़ाई गई। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
सिवनी  जिले से बरामद ट्रकों सहित अब तक कुल 17 ट्रक जब्त किए जा चुके हैं। जांच में यह सामने आया है कि सभी वाहन एफसीआई गोदाम से चावल परिवहन में लगे थे, जिससे पूरे नेटवर्क की पड़ताल और तेज हो गई है।
इस बीच जांच नोएडा स्थित एथेनॉल प्लांट के मालिक तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है और उसे तामील कराने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, अभी तक नोटिस की तामील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में सबसे अधिक चर्चा दो फरार आरोपियों—संचेती राइस मिल के संचालक और उनके पुत्र—को लेकर है। एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे जांच की गति और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

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