बालाघाट
मध्यप्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के नाम पर एफसीआई द्वारा जारी किए गए चावल के दुरुपयोग का मामला अब बड़े घोटाले का रूप लेता दिखाई दे रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार प्रदेश के 17 जिलों में संचालित 22 एथेनॉल प्लांटों को हजारों मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया था, लेकिन आरोप हैं कि कई स्थानों पर इस चावल का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के बजाय राइस मिलों में बेचने के लिए किया गया।मामले की शुरुआत बालाघाट जिले से सामने आई, जहां कथित अनियमितताओं ने पूरे प्रदेश में फैले संभावित सिंडिकेट की ओर संकेत किया है। आरोप है कि प्लांट संचालकों, राइस मिलों और अन्य संबंधित लोगों की मिलीभगत से सरकारी अनाज का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एफसीआई के रिकॉर्ड, गोदामों से जारी स्टॉक, परिवहन दस्तावेजों और संबंधित राइस मिलों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार इस मामले में व्यापक जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी या फिर मामला फाइलों तक सीमित रह जाएगा।
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