विकास या लापरवाही? नई सीसी सड़क ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें ।सोनझरा में नई सीसी सड़क के बाद जलनिकासी बाधित, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश।

वारासिवनी / बालाघाट
विकास कार्यों के नाम पर किए गए सड़क निर्माण ने ग्राम पंचायत सोनझरा के वार्ड क्रमांक-6 के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हाल ही में निर्मित सीसी सड़क के कारण जलनिकासी व्यवस्था बाधित होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने पंचायत के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान वर्षों से प्रभावी पाइप आधारित जलनिकासी व्यवस्था को समाप्त कर सीमेंट की नालियां बना दी गईं, जो बरसात के पानी की निकासी करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पहले सड़क के नीचे लगाए गए पाइपों से बारिश और नालियों का पानी आसानी से निकल जाता था, लेकिन नई सड़क बनने के बाद पानी सड़क के दोनों ओर जमा रहने लगा है। लगातार जलभराव से सड़क पर सीपेज और काई जमने लगी है, जिससे राहगीरों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो गया है।
ग्रामीण संजय मेश्राम ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान पाइपों को हटाने का विरोध किया गया था, लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि पुरानी जलनिकासी व्यवस्था बरकरार रखी जाती तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
ब्रह्मानंद श्यामकुवर का कहना है कि सड़क पर जमी काई के कारण बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया वाहन चालक फिसलने के खतरे से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि कई लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो बरसात के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीण धनेंद्र कुमार खोबरागड़े ने बताया कि उन्होंने कई बार सरपंच रविंद्र हनवत से पुरानी व्यवस्था के अनुरूप पाइप लगाने की मांग की। निर्माण कार्य के दौरान भी उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था की जाएगी, लेकिन सड़क बनने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण वार्ड में जलभराव स्थायी समस्या बन गया है। उनका मानना है कि पहले की तरह सड़क के नीचे पाइप लगाए जाने से पानी की निकासी सुचारू होगी, सड़क सुरक्षित रहेगी और दुर्घटनाओं की आशंका भी समाप्त होगी।
वार्डवासियों ने पंचायत से तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराकर सीमेंट से बने अवरोधों को हटाने और पाइप आधारित जलनिकासी व्यवस्था पुनः स्थापित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे जनपद पंचायत, जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

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