वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जिले में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि होने लगी है। खेतों, घरों के आसपास, लकड़ी एवं घास-फूस के ढेर तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में सांपों की गतिविधियां बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सांप के काटने पर किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास का सहारा न लें, बल्कि मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
👉 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने बताया कि सर्पदंश के बाद समय पर चिकित्सा उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कई लोग झाड़-फूंक या ओझा-गुनिया के चक्कर में कीमती समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार
👉 एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) 👈
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ही सर्पदंश का प्रमाणित और प्रभावी उपचार है।
उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं दूरस्थ क्षेत्रों के कई अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
👉 सर्पदंश होने पर क्या करें
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मरीज को शांत रखें और घबराने न दें।
प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं।
मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
यदि संभव हो तो सांप के रंग या पहचान की जानकारी रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने का प्रयास न करें।
आवश्यकता होने पर एम्बुलेंस या चिकित्सा सहायता के लिए तुरंत संपर्क करें।
क्या न करें
झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास का सहारा न लें।
काटे गए स्थान पर चीरा न लगाएं।
जहर चूसने का प्रयास न करें।
प्रभावित अंग पर अत्यधिक कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें।
घरेलू नुस्खों के भरोसे समय बर्बाद न करें।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वर्षा ऋतु में घरों और खेतों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, रात में टॉर्च का उपयोग करें तथा बच्चों को भी सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूक करें। विभाग का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचना और एंटी स्नेक वेनम से उपचार ही सर्पदंश से होने वाली मृत्यु को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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