जिले में खाद-बीज की कथित कालाबाजारी और अवैध भंडारण के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित कृषि केंद्र संचालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। किसानों की शिकायतों और कृषि विभाग की जांच के आधार पर मामला दर्ज कर पुलिस जांच प्रारंभ कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने और निजी गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद के भंडारण की शिकायतें सामने आई थीं। इस संबंध में प्रकाशित समाचारों के बाद कृषि विभाग ने जांच कर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। जांच के दौरान खाद-बीज के भंडारण और वितरण में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया।
अब पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि खाद-बीज का अवैध भंडारण किस उद्देश्य से किया गया था तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई किसानों को एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकना पड़ा।
किसानों और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका मानना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से न केवल किसानों को न्याय मिलेगा, बल्कि खाद-बीज वितरण व्यवस्था में भी सुधार आएगा।
कृषि विभाग के सहायक संचालक पवन कुमार कोरव ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 एवं 7 तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला पंजीबद्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
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