प्यासे सियरमऊ पहुंचे विधायक देवेंद्र पटेल, 'तीन के तिगाड़े' में मचा हड़कंप! क्या अब खुलेगी सिस्टम की नींद?



प्यासे सियरमऊ की चीख-पुकार और सूखे नलों की गूंज आखिरकार जनप्रतिनिधियों के कानों तक पहुंच ही गई। 'तीन के तिगाड़े' (ठेकेदार, बिजली विभाग और PHE) की घोर लापरवाही और सरकारी तंत्र की अनदेखी का दंश झेल रहे सियरमऊ गांव में जब विपक्ष के विधायक देवेंद्र पटेल ने कदम रखा, तो उम्मीद की एक नई किरण जागी। जहां सत्ताधारी सिस्टम और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में बेफिक्र सो रहे थे, वहीं अपने विधायक को बीच में पाकर ग्रामीणों ने अपना सारा दर्द और इस नाकामी का कच्चा-चिट्ठा उनके सामने खोलकर रख दिया। ग्रामीणों ने बताया कि कैसे लाखों रुपये की 'नल-जल योजना' महज एक सफेद हाथी बनकर रह गई है और बिलों के मकड़जाल में पूरी जनता को प्यासा मारा जा रहा है।

स्थिति की नजाकत और जनता के आक्रोश को भांपते हुए विधायक देवेंद्र पटेल ने ग्राउंड जीरो पर ही 'एक्शन मोड' अख्तियार कर लिया। उन्होंने मौके से ही PHE और बिजली विभाग के जिम्मेदारों को फोन मिलाया और सख्त लहजे में निर्देश दिए कि आपसी खींचतान और कागजी कार्रवाई के बहाने जनता का गला नहीं सुखाया जा सकता। उन्होंने तत्काल प्रभाव से इस गतिरोध को सुलझाकर पानी की सप्लाई सुचारू करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया।

अब सियरमऊ की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में सबसे बड़ा सस्पेंस यही बना हुआ है कि क्या विपक्ष के विधायक की इस कड़ी फटकार के बाद बेलगाम हो चुके सरकारी विभागों की नींद सच में खुलेगी? क्या सत्ता के नशे में बेपरवाह हो चुका सिस्टम ठेकेदार और बिजली विभाग के बीच फंसे लाखों के बिल का वो 'असमंजस' खत्म करेगा? विधायक देवेंद्र पटेल ने अपनी तरफ से गेंद प्रशासन के पाले में डाल दी है, लेकिन अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि विपक्ष के इस सीधे और कड़े दखल के बाद, सियरमऊ की इस 'दम तोड़ चुकी' नल-जल योजना की नसों में पानी कब तक दौड़ता है। क्या विधायक के निर्देश चंद घंटों में असर दिखाएंगे या फिर लालफीताशाही की फाइलों में ये आदेश भी सूखे नलों की तरह दम तोड़ देंगे?





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