रसूख का खेल: अफसर पत्नी के पावर का दुरुपयोग, दबंग ने काटी गरीब किसान की फसल, खसरे में भी हेरफेर; न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित

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रायसेन/सिलवानी। सिस्टम में साठगांठ और रसूख का असर कितना गहरा हो सकता है, इसकी बानगी रायसेन जिले में देखने को मिली है। यहां एक गरीब किसान की जमीन पर कब्जा करने के लिए दबंगई की सारी हदें पार कर दी गईं। आरोप है कि ऊंची पहुंच का रौब दिखाकर न सिर्फ किसान की पकी फसल काट ली गई, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन दूसरों के नाम दर्ज करवा दी गई। 3 महीने से दर-दर की ठोकरें खा रहा पीड़ित परिवार अब इंसाफ की आस लिए जिला कलेक्टर के दरवाजे पर पहुंचा है।



क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद रायसेन जिले की सिलवानी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बम्होरी (चिंगवाड़ा) का है। यहां के निवासी किसान शिवा मेहरा ने आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि (खसरा नंबर 253/2/2/3/1/2, रकबा 1.6020) पर भोपाल निवासी संजीव भार्गव द्वारा जबरन कब्जा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि संजीव भार्गव की पत्नी सुधा भार्गव ऊंचे पद पर आसीन हैं। पीड़ित का सीधा आरोप है कि संजीव अपनी पत्नी के पद और रसूख का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।

दबंगई का आलम यह रहा कि संजीव भार्गव ने गुड्डू मीणा के साथ मिलकर किसान शिवा मेहरा के खेत की फसल जबरन काट ली और खेत पर बखर (ट्रैक्टर) चलवा दिया।


कागजों में हेरफेर और अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप

जमीन पर कब्जे का यह खेल सिर्फ खेत तक सीमि


त नहीं रहा, बल्कि फाइलों में भी खेला गया। भूमि स्वामी शिवा मेहरा का आरोप है कि संजीव भार्गव ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ साठगांठ कर उनकी पुश्तैनी जमीन को 'पट्टे की भूमि' दर्शा दिया। इसके बाद उनके खसरे पर बटान डलवाकर जमीन उमाशंकर के नाम दर्ज करवा दी गई। किसान का साफ कहना है कि निचले स्तर के संबंधित सारे अधिकारी इस मामले में मिले हुए हैं, जिसके चलते उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।



कलेक्टर से बंधी आखिरी उम्मीद

लिखित दस्तावेजों के साथ तमाम संबंधित विभागों के चक्कर काटने के बाद भी जब 3 महीने तक कोई न्याय नहीं मिला, तो शिवा मेहरा और उनके बेटे ने अब रायसेन जिला कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा से न्याय की गुहार लगाई है। इस मामले के तूल पकड़ने पर अपर कलेक्टर मनोज उपाध्याय ने बयान दिया है कि 'मामले में जो भी नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही होगी, की जाएगी।'

 


अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल:

क्या रायसेन कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद इस बेबस किसान को उसकी जमीन वापस मिल पाएगी?

क्या ऊंचे पद पर बैठे रसूखदारों के सामने निचले स्तर के अधिकारी ऐसे ही नतमस्तक रहेंगे?

क्या पद का दुरुपयोग करने वाले दबंग संजीव भार्गव पर प्रशासन कोई सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाएगा?

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस लड़ाई में सच्चाई की जीत होती है या रसूख की।





























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