डीएसआर तकनीक से धान बुआई को बढ़ावा, सुपर सीडर/हैप्पी सीडर से किसानों को बड़ा लाभ।

बालाघाट
जिले में धान उत्पादन को अधिक लाभकारी और संसाधन-संरक्षण आधारित बनाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा किसानों को डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस आधुनिक पद्धति के साथ सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर मशीनों के उपयोग से किसानों को लागत में कमी और बेहतर उत्पादन मिल रहा है।
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि पारंपरिक रोपाई पद्धति की तुलना में डीएसआर तकनीक से धान बुआई करने पर 15 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। समतल एवं नमी युक्त खेत में सीड ड्रिल के माध्यम से 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर बीज बोने से लगभग 100 प्रतिशत अंकुरण संभव होता है। इस विधि से करीब एक माह का समय बचता है और श्रम लागत भी कम हो जाती है। साथ ही पहली सिंचाई की आवश्यकता लगभग 21 दिन बाद पड़ती है।
उन्होंने बताया कि सुपर सीडर मशीन से जुताई, बुवाई और बीज ढकने का कार्य एक साथ किया जाता है, जिससे पराली जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। इससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है। प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपये तक की लागत बचत संभव है और कम बीज दर (30-40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) में बेहतर अंकुरण प्राप्त होता है।
वहीं पारंपरिक रोपाई विधि में अधिक श्रम (280 से 300 मानव-घंटे प्रति हेक्टेयर) की आवश्यकता होती है। मजदूरों की कमी से कार्य प्रभावित होता है तथा मिट्टी की संरचना भी खराब होती है, जिससे रबी फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।
उप संचालक श्री मालवीय ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि डीएसआर तकनीक आधुनिक और लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है। “पैसा बचाएँ, भूमि का स्वास्थ्य सुधारें और सीधी बुआई अपनाकर अपनी खेती को उन्नत बनाएं। हैप्पी सीडर के उपयोग से कम मेहनत में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।”
कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे डीएसआर तकनीक अपनाकर आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाएं। सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर मशीन किराए पर प्राप्त करने के लिए किसान J-Farm App डाउनलोड कर पंजीयन कर सकते हैं।

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