10 फरवरी 2026 को जिला चिकित्सालय बालाघाट की आरएमओ डॉ. सुषमा गोयल, चिकित्सा अधिकारी डॉ. गौरव करवते, सहायक सांख्यिकी अधिकारी डॉ. श्रद्धा सिंह सहित अन्य अधिकारियों के दल ने कावरे चौक, किरनापुर स्थित क्लीनिक का आकस्मिक निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि क्लीनिक संचालक ने वर्ष 2020 में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल से डिप्लोमा इन फार्मेसी की योग्यता प्राप्त की है। साथ ही, उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ अल्टरनेट मेडिसिन, पश्चिम बंगाल से वर्ष 1994 में आर.एम.पी. (Registered Medical Practitioner) का पंजीयन कराया है, जो एलोपैथिक चिकित्सा के लिए मान्य नहीं है।
निरीक्षण के दौरान क्लीनिक से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां तथा माइनर एवं मेजर सर्जरी से संबंधित उपकरण बरामद किए गए, जिन्हें मौके पर सीलबंद कर जब्त कर लिया गया। संचालक के पास “मुस्कान फार्मेसी” के नाम से औषधि विक्रय का लाइसेंस तो उपलब्ध पाया गया, परंतु यह केवल दवाओं की बिक्री के लिए मान्य है, चिकित्सा उपचार के लिए नहीं।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अपूर्वो कुमार सरकार द्वारा बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय अर्हता के एलोपैथिक उपचार किया जा रहा था, जो मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम, 1987 का उल्लंघन है तथा धारा 24 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि 29 अप्रैल 2025 को खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण में भी संचालक वैध चिकित्सकीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके थे। इसके पश्चात प्रकरण CMHO को प्रेषित किया गया था। आदेश दिनांक 18 सितंबर 2025 के तहत गठित जांच दल ने विस्तृत जांच के बाद एफआईआर की अनुशंसा की थी।
CMHO डॉ. परेश उपलप ने आमजन से अपील की है कि वे केवल योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सकों से ही उपचार कराएं तथा अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों से सतर्क रहें।
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