जिला मुख्यालय से लगभग 36 किलोमीटर दूर वारासिवनी विकासखंड की ग्राम पंचायत सोनझरा के छोटे से ग्राम जबरटोला की पहचान कभी पेयजल संकट से जुड़ी थी। लगभग 500 की आबादी वाले इस गाँव में वर्षों तक पानी के लिए संघर्ष आम बात थी। महिलाओं को सुबह-सुबह दूरस्थ स्रोतों तक पैदल जाना पड़ता था और सीमित पानी में ही गुजारा करना पड़ता था।गाँव में पहले मुख्यमंत्री पेयजल योजना संचालित थी, लेकिन बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के कारण पर्याप्त जल आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही थी। समय के साथ समस्या और गंभीर होती गई। ऐसे में जल जीवन मिशन उम्मीद की किरण बनकर सामने आया।
जल जीवन मिशन के तहत व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई, जिसे 13 फरवरी 2020 को आधिकारिक स्वीकृति मिली। लगभग 25.77 लाख रुपये की लागत से नई नल-जल योजना विकसित की गई। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री बी. एल. उईके के अनुसार, निरंतर एवं पर्याप्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 20 किलोलीटर क्षमता के सम्पबेल का निर्माण किया गया। इससे भंडारण और दबाव संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान हुआ।
योजना के सफल क्रियान्वयन के बाद ग्राम जबरटोला के सभी 123 घरों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए गए। गाँव अब ‘हर घर जल’ के रूप में रिपोर्टेड एवं प्रमाणित हो चुका है। महिलाओं को पानी के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और श्रम की बड़ी बचत हुई है। शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से जलजनित बीमारियों के खतरे में भी कमी आई है।
ग्रामवासियों ने इस उपलब्धि के लिए नरेंद्र मोदी, डॉ मोहन यादव तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, बालाघाट के प्रति आभार व्यक्त किया है।
जबरटोला की यह कहानी दर्शाती है कि प्रभावी योजना और मजबूत क्रियान्वयन से दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की धारा बहाई जा सकती है। आज गाँव गर्व से कह रहा है 👉 जल है तो कल है। 👈
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