| आधुनिक, स्वच्छ एवं शेडयुक्त ठेला |
वारासिवनी /नगर पालिका वारासिवनी क्षेत्र के निवासी रितेश राय आज आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की प्रेरणादायक मिसाल बन चुके हैं।
रितेश का परिवार वर्षों से चाट-गुपचुप का ठेला लगाकर जीवनयापन करता रहा, लेकिन सीमित पूंजी के कारण व्यवसाय का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिलने पर रितेश ने नगर पालिका वारासिवनी के माध्यम से योजना का लाभ लिया। योजना के प्रथम चरण में उन्हें 10 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने ठेले की साफ-सफाई, सजावट और सामग्री में सुधार किया। इससे ग्राहकों की संख्या और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई।
समय पर ऋण चुकाने के बाद रितेश ने योजना के द्वितीय चरण में 20 हजार रुपये का ऋण लिया, जिससे छतरी, गैस स्टोव, बड़े बर्तन एवं अतिरिक्त मेज़ की व्यवस्था की गई। इससे व्यवसाय और व्यवस्थित हुआ तथा उनकी पहचान “गुपचुप वाले रितेश भैया” के रूप में बनने लगी। तृतीय चरण में 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर उन्होंने आधुनिक, स्वच्छ एवं शेडयुक्त ठेला तैयार कराया, जिसमें पानी की टंकी और बेहतर काउंटर की सुविधा है। साथ ही उन्होंने दो युवाओं को रोजगार भी प्रदान किया।
पीएम स्वनिधि योजना के साथ-साथ रितेश को संबल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा राशन योजना का भी लाभ मिला, जिससे उनके परिवार की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई। आज रितेश राय नगर पालिका वारासिवनी क्षेत्र के सफल हितग्राही के रूप में पहचाने जाते हैं।
रितेश का सपना भविष्य में एक छोटा स्थायी रेस्टोरेंट खोलने का है, जिससे और युवाओं को रोजगार मिल सके। उनका मानना है कि “संकल्प मजबूत हो और सही अवसर मिले, तो छोटा व्यवसाय भी बड़े सपनों को साकार कर सकता है।”
रितेश राय की यह कहानी साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और आत्मविश्वास मिलकर जीवन की दिशा बदल सकते हैं। चाट-गुपचुप के ठेले से शुरू हुआ यह सफर आज आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करता दिखाई देता है।
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