Raisen/Silwani: जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) के नेतृत्व में आदिवासी समाज ने जनहित से जुड़ी तीन ठोस मांगों को लेकर औपचारिक रूप से ज्ञापन सौंपा है। 18 जनवरी, रविवार को सिलवानी दौरे पर आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह ज्ञापन सौंपा गया, जिससे यह मामला सीधे शीर्ष स्तर तक पहुँचा। यह कोई भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत और दस्तावेज़ी तथ्यों पर आधारित एक गंभीर पहल है। पहली मांग साफ और स्पष्ट है—शासकीय महाविद्यालय सिलवानी का नामकरण आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर किया जाए, ताकि शिक्षा के साथ-साथ इतिहास और सम्मान भी जुड़ सके। यह मांग वर्षों से आदिवासी समाज की भावनाओं से जुड़ी रही है। दूसरी मांग और भी संवेदनशील है—प्रशासनिक त्रुटियों या प्रक्रियागत गड़बड़ियों के कारण जिन आदिवासी परिवारों की भूमि रिकॉर्ड में गैर-आदिवासियों के नाम दर्ज हो गई है, उसका विधिसम्मत डेटा सुधार कर वास्तविक भूमिधारकों को उनका हक लौटाया जाए। यह मुद्दा आजीविका, पहचान और अस्तित्व से जुड़ा है, किसी आरोप से नहीं। तीसरी मांग सीधे जीवन और स्वास्थ्य से संबंधित है—सिलवानी का नव-निर्मित सिविल हॉस्पिटल, जो तैयार होने के बावजूद अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सका, उसे शीघ्र चालू किया जाए ताकि गरीब और आदिवासी परिवारों को इलाज के लिए दूर भटकना न पड़े। JAYS का कहना है कि ये तीनों मांगें विकास, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी हैं। संगठन ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी है और प्रशासन से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताई है। अब सवाल सिर्फ इतना है कि जब मांगें स्पष्ट हैं, दस्तावेज़ मौजूद हैं और ज्ञापन सौंपा जा चुका है, तो निर्णय में देरी क्यों? केके रिपोर्टर आपसे पूछता है—क्या सिलवानी की यह जायज़ आवाज़ अब असर दिखाएगी, या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?
Raisen/Silwani: जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) के नेतृत्व में आदिवासी समाज ने जनहित से जुड़ी तीन ठोस मांगों को लेकर औपचारिक रूप से ज्ञापन सौंपा है। 18 जनवरी, रविवार को सिलवानी दौरे पर आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह ज्ञापन सौंपा गया, जिससे यह मामला सीधे शीर्ष स्तर तक पहुँचा। यह कोई भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत और दस्तावेज़ी तथ्यों पर आधारित एक गंभीर पहल है। पहली मांग साफ और स्पष्ट है—शासकीय महाविद्यालय सिलवानी का नामकरण आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर किया जाए, ताकि शिक्षा के साथ-साथ इतिहास और सम्मान भी जुड़ सके। यह मांग वर्षों से आदिवासी समाज की भावनाओं से जुड़ी रही है। दूसरी मांग और भी संवेदनशील है—प्रशासनिक त्रुटियों या प्रक्रियागत गड़बड़ियों के कारण जिन आदिवासी परिवारों की भूमि रिकॉर्ड में गैर-आदिवासियों के नाम दर्ज हो गई है, उसका विधिसम्मत डेटा सुधार कर वास्तविक भूमिधारकों को उनका हक लौटाया जाए। यह मुद्दा आजीविका, पहचान और अस्तित्व से जुड़ा है, किसी आरोप से नहीं। तीसरी मांग सीधे जीवन और स्वास्थ्य से संबंधित है—सिलवानी का नव-निर्मित सिविल हॉस्पिटल, जो तैयार होने के बावजूद अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सका, उसे शीघ्र चालू किया जाए ताकि गरीब और आदिवासी परिवारों को इलाज के लिए दूर भटकना न पड़े। JAYS का कहना है कि ये तीनों मांगें विकास, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी हैं। संगठन ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी है और प्रशासन से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताई है। अब सवाल सिर्फ इतना है कि जब मांगें स्पष्ट हैं, दस्तावेज़ मौजूद हैं और ज्ञापन सौंपा जा चुका है, तो निर्णय में देरी क्यों? केके रिपोर्टर आपसे पूछता है—क्या सिलवानी की यह जायज़ आवाज़ अब असर दिखाएगी, या फिर फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?
