जिले में कम वर्षा के कारण किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में सूखने लगी हैं। अपनी मेहनत और पूंजी को बर्बाद होते देख किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। पानी की मांग को लेकर जिले के सात गांवों के किसानों एवं ग्रामीणों ने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया है।
कटोरी, भंडारबोड़ी, फूलचूर, मानेगांव, निलामा, डोंगरिया और चिचोली के किसानों एवं ग्रामीणों द्वारा पानी की समस्या के समाधान की मांग को लेकर भूख हड़ताल की जा रही है।
👉 खेतों में सूख रही फसलें, किसानों की बढ़ी चिंता
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किसानों का कहना है कि इस वर्ष कम बारिश होने के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची है। पानी की कमी से फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों को चिंता सता रही है कि यदि समय रहते सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है।
👉 सात गांवों के किसानों ने खोला मोर्चा
पानी की समस्या को लेकर कटोरी, भंडारबोड़ी, फूलचूर, मानेगांव, निलामा, डोंगरिया और चिचोली के किसानों ने एकजुट होकर आंदोलन शुरू किया है। भूख हड़ताल पर बैठे किसानों एवं ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
👉 किसानों का सवाल—आखिर कब मिलेगा खेतों को पानी?
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किसानों के इस आंदोलन ने सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अन्नदाता अपनी फसल बचाने के लिए भूख हड़ताल करने को मजबूर हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसानों की मांग पर तत्काल संज्ञान लेकर सिंचाई के पानी की व्यवस्था करेगा या किसानों को अपनी मांगों के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ेगा?
👉 प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
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सात गांवों के किसानों की भूख हड़ताल के बाद अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। किसानों की मांग है कि खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए शीघ्र प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि फसलों को और अधिक नुकसान होने से बचाया जा सके।
फिलहाल किसानों का स्पष्ट संदेश है—जब तक पानी की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।
