जनपद पंचायत खैरलांजी की अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य श्रीमती आशु बघेले के निर्वाचन को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में कलेक्टर न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कलेक्टर न्यायालय द्वारा 14 मई 2026 को पारित आदेश में श्रीमती आशु बघेले का जनपद सदस्य एवं अध्यक्ष पद का निर्वाचन निरस्त कर दिया गया है। न्यायालय ने उन्हें निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 19 से अयोग्य घोषित करते हुए दोनों निर्वाचन शून्य करार दिए हैं।
यह मामला जनपद सदस्य खुशबू बिसेन द्वारा दायर निर्वाचन याचिका के बाद सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि श्रीमती आशु बघेले ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिला हेतु आरक्षित सीट से चुनाव लड़ते समय मध्यप्रदेश शासन के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया था। उनके द्वारा महाराष्ट्र शासन से जारी पिंजारा जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर नामांकन दाखिल किया गया था, जबकि मध्यप्रदेश पंचायत निर्वाचन नियमों के अनुसार आरक्षित वर्ग की सीट पर चुनाव लड़ने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र आवश्यक है।
प्रकरण की प्रारंभिक सुनवाई कलेक्टर न्यायालय में हुई थी, जिसके बाद मामला मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय पहुंचा। उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी 2026 को पूर्व आदेश निरस्त करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि 1 फरवरी 2019 को संशोधित पंचायत निर्वाचन नियमों के तहत आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र अनिवार्य है तथा केवल शपथ-पत्र के आधार पर पात्रता स्वीकार नहीं की जा सकती।
पुनः सुनवाई के दौरान अनावेदक पक्ष ने राज्य निर्वाचन आयोग के परिपत्र एवं शपथ-पत्र का हवाला देते हुए नामांकन को वैध बताया। वहीं आवेदिका पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए निर्वाचन निरस्त करने की मांग रखी।
कलेक्टर न्यायालय ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि श्रीमती आशु बघेले ने स्वयं नामांकन पत्र के संबंधित कॉलम में “नहीं” अंकित कर यह स्वीकार किया था कि उनके पास मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं था। न्यायालय ने माना कि महाराष्ट्र शासन द्वारा जारी प्रमाण-पत्र मध्यप्रदेश में आरक्षण लाभ प्राप्त करने के लिए वैध नहीं माना जा सकता। ऐसे में नामांकन स्वीकार किया जाना वैधानिक त्रुटि है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनरीक्षण याचिका दायर होने मात्र से मूल आदेश पर स्वतः स्थगन लागू नहीं होता। बाद में उच्च न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण याचिका भी खारिज कर दी गई, जिसके पश्चात कलेक्टर न्यायालय ने अंतिम निर्णय पारित किया।
आदेश के अनुसार श्रीमती आशु बघेले को जनपद पंचायत खैरलांजी के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 19 से जनपद सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। साथ ही उनका अध्यक्ष पद का निर्वाचन भी शून्य एवं निरस्त कर दिया गया है। न्यायालय ने सक्षम प्राधिकारी को रिक्त पदों पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
इस फैसले के बाद खैरलांजी क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों में हलचल तेज हो गई है और स्थानीय राजनीति में इसे बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
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