:जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 32 गांवों की माटी-जल से हुआ भूमि सुपोषण कार्यक्रम।

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वारासिवनी / बालाघाट
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, विकासखंड वारासिवनी द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के अंतर्गत जल संरक्षण को लेकर एक सराहनीय पहल की गई। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शासकीय महाविद्यालय वारासिवनी में संगोष्ठी एवं भूमि सुपोषण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के तहत वारासिवनी क्षेत्र के 32 गांवों से पवित्र माटी एवं जल एकत्रित कर विधिवत माटी पूजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण, सामूहिक सहभागिता, स्वावलंबन एवं स्वैच्छिकता के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाना रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता नयनसुख ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत भूमि सुपोषण कार्यक्रम एक पवित्र और आवश्यक पहल है। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है, जिससे फसलों के पोषक तत्व कम हो रहे हैं और विभिन्न बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में प्राकृतिक तरीकों से भूमि को पुनः सुपोषित करना बेहद जरूरी है।
वहीं सुरेंद्र कुमार भगत ने जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि अभी से पानी की एक-एक बूंद बचाने का प्रयास नहीं किया गया, तो आने वाला समय गंभीर संकट का रूप ले सकता है। उन्होंने “जल नहीं तो कल नहीं” का संदेश देते हुए वाटर हार्वेस्टिंग, बोरी बंधान एवं सोख्ता गड्ढों के निर्माण जैसे छोटे-छोटे उपायों को अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में छात्र-छात्राओं को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। इस दौरान परामर्शदाताओं सहित मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही। इस आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।
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