शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके नाम पर लगभग ₹43,662 की मजदूरी राशि जमा हुई थी। प्रार्थियों ने इसे शासकीय नियमों के विपरीत बताते हुए इसे कथित वित्तीय अनियमितता करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित खातों, मस्टरोल अभिलेखों एवं भुगतान प्रक्रिया की गहन जांच कराई जाए।
मामले के साथ-साथ ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्न उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई कार्यों में निर्धारित मानकों एवं तकनीकी गुणवत्ता का पालन नहीं किया गया, जिससे योजनाओं की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्यों की स्थिति की तकनीकी जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्रार्थियों ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पदाधिकारियों को पद से पृथक कर भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जाए।
बताया गया है कि इस संबंध में आवेदन पत्र एवं शपथ पत्र संबंधित विभाग को प्रस्तुत किए जा चुके हैं। फिलहाल ग्रामीणों को प्रशासनिक जांच एवं आगे की कार्रवाई का इंतजार है। मामले ने ग्राम स्तर पर शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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