बैठक में जी.एस. धुर्वे (अपर कलेक्टर), डॉ. परेश उप्लव (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी), जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री जितेन्द्र धुर्वे, जनपद पंचायत बालाघाट की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री ममता कुलस्ते, खाद्य विभाग से श्री पी.एस. वलाड़ी, महिला एवं बाल विकास विभाग से श्री विरेन्द्र गोखले, जिला बाल कल्याण समिति के सदस्यगण, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्था “आवाज” से श्री शिवगिरी गोस्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता श्री हरि गौतम तथा श्रम विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का संचालन प्रभारी सहायक श्रम पदाधिकारी श्री मयंक दीक्षित द्वारा किया गया।
बैठक में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों एवं हालिया संशोधनों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का किसी भी प्रकार के कार्य में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है, जबकि 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों का खतरनाक प्रक्रियाओं एवं उद्योगों में नियोजन वर्जित है। विभाग द्वारा अब तक की गई कार्रवाई, सतत निरीक्षण एवं निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।
जिला बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने ध्यानाकर्षित किया कि शादी, पार्टी एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में नाबालिग लड़कियों से कार्य कराए जाने की शिकायतें प्राप्त होती हैं। इस पर सीईओ जिला पंचायत ने इवेंट आयोजकों एवं केटरर्स की बैठक आयोजित कर सख्त दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए, ताकि ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
जिला विधिक सहायता अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में पीड़ित श्रमिकों को शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया एवं उनके अधिकारों की जानकारी नहीं होती। इस पर अध्यक्ष ने अधिनियम के प्रमुख बिंदुओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, जनसुनवाई के दौरान संबंधित जानकारी प्रदर्शित करने तथा जनजागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुँचाने पर जोर दिया।
बैठक में समाज के सभी वर्गों को अभियान से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया। प्रभारी सहायक श्रम पदाधिकारी श्री दीक्षित ने जानकारी दी कि एनएसएस, एनसीसी कैडेट्स, समाज कार्य एवं विधि संकाय के विद्यार्थियों को अभियान में सहभागी बनाकर युवा शक्ति को जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अभिषेक सराफ ने सभी विभागों के समन्वय से सशक्त निगरानी एवं प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बच्चों एवं श्रमिकों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो, यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक का समापन बाल श्रम उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों के संकल्प के साथ हुआ।
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