नरवाई जलाना छोड़ें किसान - आधुनिक यंत्र अपनाएँ – मिट्टी भी बचेगी, पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

बालाघाट
फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष (नरवाई/पराली) को जलाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों से प्रबंधन करने की अपील कृषि विभाग द्वारा किसानों से की जा रही है। विभाग के अनुसार नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, यदि अवशेषों को मिट्टी में मिलाया जाए या भूसा बनाकर उपयोग किया जाए, तो भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और खेती की लागत में कमी आती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नरवाई को खेत में सड़ाने अथवा स्ट्रा रीपर मशीन से भूसा बनाकर पशु आहार के रूप में उपयोग करने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। फसल अवशेषों में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व मिट्टी में मिलकर रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करते हैं। साथ ही अवशेषों की परत मिट्टी की नमी को लंबे समय तक संरक्षित रखने में सहायक होती है।
उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय ने बताया कि नरवाई प्रबंधन से मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि, पोषक तत्वों की बचत, नमी संरक्षण, वायु प्रदूषण पर नियंत्रण तथा मित्र कीटों एवं सूक्ष्म जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इससे सिंचाई और खाद की लागत में भी कमी आती है।
उन्होंने बताया कि हैप्पी सीडर मशीन के माध्यम से कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद खेत में पड़ी नरवाई को हटाए या जलाए बिना सीधे बुवाई की जा सकती है। मशीन में लगी घूमने वाली पट्टियां बोनी की कतार के सामने की नरवाई काटकर बिछा देती हैं और जीरो टिलेज तकनीक से बीज की बुवाई कर देती हैं। समय के साथ नरवाई विघटित होकर मिट्टी में मिल जाती है।
इसी प्रकार सुपर सीडर एक आधुनिक ट्रैक्टर संचालित यंत्र है, जो एक ही बार में जुताई, बुवाई और खाद डालने का कार्य करता है। यह पराली को काटकर मिट्टी में मिलाते हुए बुवाई करता है, जिससे भूमि की उत्पादकता बढ़ती है और पराली जलाने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
अनुदान एवं आवेदन प्रक्रिया:
किसान http://farmermpdage.org� पोर्टल पर एमपी ऑनलाइन केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद अधिकृत विक्रेता सूची से 7 दिनों के भीतर यंत्र का चयन करना आवश्यक होगा। भुगतान डीडी, आरटीजीएस, एनईएफटी अथवा ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा।
आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, भूमि खतौनी (बी-1), पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर, ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र (एससी हेतु) एवं बैंक पासबुक शामिल हैं।
हैप्पी सीडर की कीमत लगभग 1.70 से 2.00 लाख रुपये है, जिस पर करीब 85 हजार रुपये तक अनुदान उपलब्ध है। वहीं सुपर सीडर की कीमत 2.60 से 3.00 लाख रुपये के बीच है, जिस पर लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं और आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाएं, जिससे मिट्टी, पर्यावरण और भविष्य – तीनों सुरक्षित रह सकें।
 

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