स्वास्थ्य विभाग बीमार, सीएमएचओ की कुर्सी ICU में! सीएमएचओ सर्कस पर कोर्ट का डंडा, मांडरे फिर बॉस


केके रिपोर्टर की कलम से....
जो कुर्सी पर बैठे थे वही क़ानून समझाने लगे, अदालत आई तो सबकी ज़ुबान बदल गई। रायसेन का सीएमएचओ प्रकरण अब फाइलों का मामला नहीं रहा, ये पूरा-का-पूरा प्रशासनिक तमाशा बन चुका है, जहां कुर्सी घूम रही है और सिस्टम तालियां बजा रहा है। 9 जनवरी 2026 को शासन ने बड़े आत्मविश्वास से डॉ. एचएन मांडरे को हटाकर डॉ. दिनेश खत्री को सीएमएचओ की कुर्सी पर बैठाया, लेकिन हाईकोर्ट जबलपुर ने महज़ 13 दिनों में ऐसा ब्रेक लगाया कि पूरा “फैसला” रिवर्स गियर में चला गया। कोर्ट ने साफ कहा—अगली सुनवाई तक मांडरे साहब ही प्रभारी रहेंगे, यानी कप्तान बदला नहीं, बस टीम को भ्रम में डाल दिया गया। कानूनी पेंच ये है कि 7 जून 2025 का ट्रांसफर आदेश पहले से लागू था और 30 अगस्त 2022 के परिपत्र के मुताबिक स्पेशलिस्ट को पब्लिक हेल्थ मैनेजमेंट कैडर का प्रभार देना सवालों के घेरे में है—इसीलिए कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब कर लिया। अब खबर की असली दवा यहां काम करती है: खत्री साहब की “कमबैक पारी” क्रिकेट में ओपनर के बिना खेले आउट होने जैसी रही—हेलमेट पहना, गार्ड लिया और पवेलियन लौटे। सूत्रों और पूर्व की मीडिया रिपोर्ट्स में उनके नाम से जुड़े विवादों की चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं—कहीं प्रशासनिक व्यवहार को लेकर, कहीं कार्यप्रणाली को लेकर—हालांकि ये सभी आरोप कथित हैं और किसी पर अंतिम न्यायिक मुहर नहीं लगी है। उधर मांडरे साहब फिर “24×7 उपलब्ध” वाले पोस्टर बॉय बनकर लौट आए। मरीजों की हालत ये है कि वार्ड में इलाज से ज़्यादा चर्चा कुर्सी की हो रही है—क्योंकि जब सिस्टम खुद घूम रहा हो, तो स्वास्थ्य सेवा स्थिर कैसे रहे? हाईकोर्ट ने फिलहाल ड्रामा रोक दिया है, लेकिन असली सवाल वही पुराना है—इलाज पहले या कुर्सी? जवाब शायद अगली सुनवाई में मिलेगा। तब तक रायसेन स्वास्थ्य विभाग में सेवा नहीं, सस्पेंस ऑन ड्यूटी है। और अंत में अदालत आई तो पता चला, कुर्सी भी कानून से डरती है। 




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