सिलवानी: सैकड़ों की भीड़, ब्राह्मण समाज ने कहा – संतोष वर्मा पर हो सख्त कार्रवाई

 मध्य प्रदेश में ब्राह्मण समाज का आक्रोश: आईएएस संतोष वर्मा की विवादित टिप्पणी से भड़का बवाल, सरकार ने जारी किया शो-कॉज नोटिस

सीएम के नाम सिलवानी में ज्ञापन

भोपाल/सिलवानी, 30 नवंबर 2025 (अभयवाणी): मध्य प्रदेश में एक छोटी सी टिप्पणी ने सामाजिक सद्भाव को हिला दिया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा की आरक्षण पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने ब्राह्मण समाज को सड़कों पर उतार दिया है। 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (एजेकेस) के प्रांतीय सम्मेलन में वर्मा, जो संघ के नए प्रांतीय अध्यक्ष चुने गए थे, ने कहा, "एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए, जब तक कि कोई ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे को न दे दे या उसके साथ रिश्ता न जोड़े, अगर बात सिर्फ आर्थिक स्थिति की है।" यह बयान आरक्षण को आर्थिक आधार पर सीमित करने की बहस के बीच आया, लेकिन 'कन्यादान' की पवित्र परंपरा को निशाना बनाकर ब्राह्मण बेटियों का अपमान माना गया। वीडियो वायरल होते ही पूरे राज्य में हंगामा मच गया।अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राज्य अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने इसे "अश्लील, जातिवादी और ब्राह्मण बेटियों का अपमान" करार देते हुए तत्काल एफआईआर, विशेष जांच समिति गठन, कठोर कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई न हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन होगा। परशुराम सेना और अन्य संगठनों ने इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया। विरोध की लहर भोपाल, ग्वालियर, सिवनी, रायसेन, राजगढ़, सिंगरौली और नर्मदापुरम जैसे जिलों में फैल गई। ग्वालियर में वकील और समाजजन एसपी कार्यालय पहुंचे, राजगढ़ में वर्मा का पुतला दहन हुआ, जबकि भोपाल के एमपी नगर थाने के बाहर प्रदर्शन किए गए।सिलवानी में तो मामला और गर्म हो गया। शनिवार को सैकड़ों ब्राह्मण समाज के लोग तहसील कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि वर्मा की टिप्पणी ने समाज की मर्यादा, संस्कृति और परंपराओं पर चोट की है, जिससे व्यापक रोष फैला है। ब्राह्मण समाज, जो सदैव शांति, सद्भाव और राष्ट्रहित के लिए जाना जाता है, ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेगा। परशुराम सेना मध्य प्रदेश ने मांग की—तुरंत एफआईआर दर्ज हो, दोषी पर कठोरतम कार्रवाई हो और वर्मा सार्वजनिक रूप से लिखित-मौखिक माफी मांगें। तहसीलदार ने ज्ञापन स्वीकार कर आश्वासन दिया कि इसे शीघ्र मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। मौके पर भारी भीड़ थी, माहौल गरम था, लेकिन सबने शांति बनाए रखी।सरकार ने भी त्वरित कदम उठाया। 27 नवंबर को सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी किया, जिसमें टिप्पणी को "सेवा नियमों का उल्लंघन, सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा और गंभीर कदाचार" बताया गया। एआईएस (कंडक्ट) रूल्स 1968 के उल्लंघन का हवाला देते हुए 7 दिनों में जवाब मांगा गया। वर्मा, जो 2012 बैच के आईएएस हैं और वर्तमान में कृषि विभाग में उपसचिव हैं, ने सफाई दी कि उनका 27 मिनट का भाषण था, लेकिन 2 सेकंड का क्लिप चुन-चुनकर वायरल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मेरा इरादा किसी समुदाय या महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। अगर किसी की भावनाएँ आहत हुईं तो मैं क्षमा मांगता हूँ।" फिर भी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव ने उन्हें "चरित्रहीन" कहकर आईएएस अवॉर्ड रद्द करने की मांग की, जबकि कांग्रेस ने भी सख्त कार्रवाई की बात कही।वर्मा का विवादित इतिहास पहले भी रहा है—2021 में एक महिला के खिलाफ आपराधिक धमकी के मामले में जाली कोर्ट ऑर्डर बनाने का आरोप लगा था। सोशल मीडिया पर #DismissSantoshVerma ट्रेंड कर रहा है। यह मामला अब आरक्षण बहस को जातिगत तनाव में बदल चुका है। ब्राह्मण समाज का कहना है कि "बेटियों की गरिमा पर चोट बर्दाश्त नहीं", जबकि समर्थक इसे संदर्भ से हटाकर पेश करने का आरोप लगा रहे हैं। सरकार की अगली चाल पर सबकी नजरें हैं—क्या एफआईआर होगी या सिर्फ नोटिस पर रुकेगा? सिलवानी से कृष्ण कांत सोनी की विशेष रिपोर्ट।

إرسال تعليق

0 تعليقات
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.