“फिर आया सर्वे का शोर… लेकिन क्या इस बार सच में रायसेन तक पहुंचेगी ट्रेन की सीटी?” “या जनता को फिर दिखेगा विकास का हवाई सपना?”


13 साल से अटकी ट्रेन

केके की कलम से....

रायसेन जिले की बहुप्रतीक्षित भोपाल-रायसेन-सागर रेल लाइन एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 13 साल पहले तत्कालीन विदिशा सांसद स्वर्गीय सुषमा स्वराज ने इस रेल परियोजना का सपना जनता को दिखाया था। उस वक्त लोगों को उम्मीद थी कि रायसेन भी विकास की रेल से जुड़ जाएगा, लेकिन समय बीतता गया और सपना सरकारी फाइलों में धूल खाता रह गया।

अब एक बार फिर इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 69 लाख रुपए के सैटेलाइट और हवाई सर्वे की चर्चा तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि आधुनिक तकनीक से रेलवे रूट का नया अध्ययन होगा। लेकिन जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल वही पुराना है— “सर्वे तो पहले भी हुए थे, आखिर ट्रेन कब चलेगी?”

केके की नजर से देखें तो यह सिर्फ रेलवे लाइन का मामला नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का इम्तिहान बन चुका है। रायसेन के लोगों ने वर्षों तक वादे सुने, घोषणाएं देखीं, लेकिन जमीन पर आज तक पटरियां नहीं बिछीं। अब लोगों को डर है कि कहीं यह नया सर्वे भी राजनीतिक फाइलों की शोभा बनकर न रह जाए।

सरकारी दफ्तरों में योजनाओं की मोटी फाइलें जरूर बढ़ती गईं, लेकिन विकास की असली ट्रेन अब तक स्टेशन से रवाना नहीं हुई। जनता अब भाषण नहीं, जमीन पर काम देखना चाहती है।

🔥 केके का सवाल: “क्या इस बार सच में रायसेन को रेल लाइन मिलेगी… या फिर जनता को दोबारा विकास का ‘हवाई सर्वे’ ही दिखाया जाएगा?”

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