कुर्सी एक, दावेदार दो और चैंबर पर 'मोटा ताला': रायसेन स्वास्थ्य विभाग में अफसरों का बेशर्म तमाशा!

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 "तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि क़ाफ़िला क्यूँ लुटा, मुझे रहज़नों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है!" मशहूर शायर का यह शेर रायसेन स्वास्थ्य विभाग की उस 'जादुई कुर्सी' पर बिल्कुल सटीक बैठता है, जिस पर चिपके रहने के लिए दो बड़े अधिकारी आपस में लड़कर सीधे कोतवाली थाने पहुंच गए हैं। दैनिक भास्कर में छपी एक विस्तृत रिपोर्ट के हवाले से बताने वाले बताते हैं कि रायसेन में सीएमएचओ की कुर्सी को लेकर ऐसा 'म्यूजिकल चेयर' चल रहा है कि मरीजों का इलाज तो राम-भरोसे हो गया है। इस पूरे प्रशासनिक ड्रामे के सबसे दिलचस्प किरदार हैं डॉ. दिनेश खत्री; चर्चा है कि ये वही साहब हैं जिनके पिछले कार्यकाल में कथित तौर पर करोड़ों का GPF और 'घोस्ट एम्प्लॉई' घोटाला सुर्खियों में रहा, जहाँ मुर्दों तक की पेंशन डकार ली गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्हीं कारनामों के चलते 7 जून 2025 को शासन ने उन्हें राजगढ़ ट्रांसफर कर दिया था, लेकिन सत्ता के गलियारों में ऐसी क्या 'अंदरूनी सेटिंग' है कि खत्री जी वापस उसी मलाईदार कुर्सी पर लौट आए और अब हटने का नाम नहीं ले रहे? भास्कर की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि 8 अप्रैल के हाईकोर्ट के 'यथास्थिति' आदेश का इन दोनों अधिकारियों ने अपनी-अपनी सुविधा से ऐसा मनमाफिक चीरहरण किया है कि मंगलवार दोपहर जब डॉ. एचएन मांडरे चार्ज लेने पहुंचे, तो खत्री जी ने चैंबर पर मोटा ताला जड़ दिया और कुर्सी बचाने की जद्दोजहद में उल्टे थाने में जाकर उनके खिलाफ शिकायत ठोक दी! अब पूरे महकमे में कानाफूसी जोरों पर है कि दागदार अतीत के बावजूद इस कुर्सी-प्रेम को आखिर किस बड़े आका का संरक्षण प्राप्त है, जो मामला सुलझने नहीं दे रहा? सत्ता की इस बेशर्म खींचतान और अधिकारियों के रवैये को देखकर दुष्यंत कुमार का वो शेर एकदम याद आता है कि- "तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं!" आखिर इस कुर्सी के पाये में ऐसा कौन सा फेविकोल लगा है कि कोर्ट के डंडे के बावजूद साहब इसे छोड़ने को राज़ी ही नहीं हैं?

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