जिले में एक मादा तेंदुए की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। यह घटना वन अपराध प्रकरण क्रमांक 383/05 दिनांक 03 अप्रैल 2026 के तहत लामटा परियोजना मंडल के वारासिवनी परिक्षेत्र अंतर्गत सादाबोड़ी बीट के वनकक्ष क्रमांक 782 (टी.पी. 2020) में दर्ज की गई है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए क्षेत्र की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (नई दिल्ली) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, भोपाल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास के क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाया गया।
मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. देवव्रत डेहरिया (कटंगी), डॉ. बादल पटले (बालाघाट) एवं डॉ. शुभम उईके (खैरलांजी )शामिल रहे। जांच के दौरान तेंदुए के सभी अंग सुरक्षित पाए गए और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या अंगों की चोरी के संकेत नहीं मिले। आवश्यक नमूनों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित कर सीलबंद किया गया है।
पोस्टमार्टम उपरांत 04 अप्रैल 2026 को एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार शव का विधिवत दाह संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्य वन संरक्षक गौरव चौधरी, वन मंडलाधिकारी नित्यानंदम एल., संभागीय प्रबंधक रामकिशन सोलंकी, तहसीलदार गीता राहंगडाले सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।
वन विभाग ने मामले में वन अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेंदुए की मौत आपसी संघर्ष के कारण होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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