1490 गाँव और 15 खटारा दमकलें: स्वागत है रायसेन जिले के 'हाई-टेक' और 'राम भरोसे' प्रशासन में!


रायसेन में आग लगे बस्ती में, और हमारा सिस्टम अपनी मस्ती में! 1490 गाँव, भीषण गर्मी और पूरे जिले की हिफाज़त के नाम पर महज़ 15 दमकलें... ज़ोरदार तालियां बजाइए इस 'राम भरोसे' प्रशासन के लिए! कागजों पर 'नगर परिषद' का झुनझुना थामे बम्होरी का ही हाल देख लीजिए, जहाँ 11KV लाइन की चिंगारी ने किसान हाकम सिंह की 10 एकड़ पकी गेहूं की फसल और 90 पाइप स्वाहा कर दिए; आग बुझाते-बुझाते भतीजा झुलस गया, लेकिन सिलवानी से फायर ब्रिगेड का इंतज़ार ऐसा रहा जैसे रेगिस्तान में बारिश का! ग्राम पंचायतों के पास आग बुझाने को एक लोटा पानी नहीं है और सलामतपुर के जंगल सुलगते हैं, तो 30 किलोमीटर दूर रायसेन से दमकल हांफते हुए दौड़ती है; सोचिए, पीछे शहर में कोई भयंकर हादसा हो जाए तो क्या प्रशासन सिर्फ बैठकर तमाशा देखेगा? खुद रायसेन नपा के दमकल प्रभारी शशिकांत मोहड़ बेबस हैं, खुलेआम मान रहे हैं कि उनके पास एक नई और एक खटारा दमकल है, जबकि मुख्यालय को कम से कम 3-4 गाड़ियां चाहिए। 'आधुनिक फायर स्टेशन' की मांग सालों से सरकारी टेबलों पर धूल फांक रही है, तो क्या ये कुंभकर्णी सिस्टम अब तभी जागेगा जब किसानों का खून-पसीना और जनता की गाढ़ी कमाई पूरी तरह राख के ढेर में तब्दील हो जाएगी?



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