कार्यक्रम की शुरुआत चौपाल संगोष्ठी से हुई, जिसमें विकासखंड समन्वयक सुरेन्द्र कुमार भगत ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध जीवन की आधारशिला है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता संबंधी आदतों को अपनाएं और गांव को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
संगोष्ठी के दौरान जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए श्री भगत ने “घर का पानी घर में, गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में” के संकल्प को दोहराया। उन्होंने बताया कि वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण एवं जल का विवेकपूर्ण उपयोग आज की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने नशामुक्ति, हरित पर्यावरण और शासकीय योजनाओं के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के विषय पर भी जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
इसके उपरांत प्रतिभागियों ने श्रमदान करते हुए गांव में स्वच्छता गतिविधियां संचालित कीं। इस दौरान कचरा संग्रहण, नालियों की सफाई एवं सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्थित साफ-सफाई की गई। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे नियमित रूप से जारी रखने की सहमति व्यक्त की।
कार्यक्रम समन्वयक दीपक आड़े ने अपने संबोधन में सामूहिक सहभागिता की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि गांव के विकास एवं स्वच्छता में प्रत्येक नागरिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे स्वच्छता को एक सतत प्रक्रिया के रूप में अपनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
अंत में उपस्थित ग्रामीणों को स्वच्छता एवं जनजागरूकता की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारी, छात्र-छात्राएं, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। आयोजन ने गांव में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हुए सामुदायिक सहभागिता एवं जागरूकता का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया।
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