अशासकीय विद्यालयों को निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के स्थान पर म.प्र. पाठ्यपुस्तक निगम की सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें क्रय करना होगा।

बालाघाट
प्रदेश के अशासकीय विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के उपयोग से अभिभावकों पर पड़ रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने ठोस कदम उठाए हैं। शासन के निर्देशानुसार अब अशासकीय विद्यालयों को निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के स्थान पर मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य रूप से अपनानी होंगी।
मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा एस.सी.ई.आर.टी. एवं एन.सी.ई.आर.टी. के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 1 से कक्षा 12 तक उच्च गुणवत्ता की पाठ्यपुस्तकें अत्यंत कम कीमत पर मुद्रित कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाती हैं। शासन के निर्देशों के अनुसार म.प्र. माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध सभी विद्यालयों में इन्हीं पुस्तकों से पठन-पाठन कराना अनिवार्य है।
इसके बावजूद प्रदेश के अनेक अशासकीय विद्यालयों में शासकीय प्रकाशकों की पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें उपयोग में लाई जा रही हैं, जिनकी कीमत पाठ्यपुस्तक निगम की पुस्तकों की तुलना में 5 से 10 गुना तक अधिक है। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ रहा है।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शासन द्वारा आवश्यक कार्यवाहियां सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बताया कि निर्देशानुसार म.प्र. पाठ्यपुस्तक निगम के डिपो प्रभारियों को अपने क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अशासकीय विद्यालयों की सूची जिला शिक्षा अधिकारी एवं डीपीसी कार्यालय से प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके पश्चात विद्यालयों के प्राचार्यों को निगम प्रकाशनों की मूल्य सूची प्रेषित की जाएगी, ताकि वे निगम के पंजीकृत पुस्तक विक्रेताओं अथवा सीधे निगम के डिपो से 20 प्रतिशत रिबेट पर एकमुश्त अपने विद्यालय के सभी विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें क्रय कर सकें।
इसके अतिरिक्त स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आगामी महीनों में प्रत्येक विकासखंड स्तर पर पुस्तक मेले आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है। इस संबंध में डिपो प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित बीआरसी/बीईओ से समन्वय कर पुस्तक मेले की तिथि एवं स्थान की जानकारी प्राप्त करें तथा म.प्र. पाठ्यपुस्तक निगम के प्रकाशनों के स्टॉल लगाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। आयोजन पर होने वाले व्यय की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव मुख्यालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को न्यूनतम लागत पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्यसामग्री उपलब्ध हो सके और अभिभावकों पर पड़ने वाला अनावश्यक आर्थिक बोझ कम किया जा सके। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समानता, पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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