डायरिया पर वार करने मैदान में उतरा पीएचई विभाग, गांव-गांव पहुंचकर परखी पेयजल की गुणवत्ता एफटीके किट से जल स्रोतों की जांच, हाथ धोने के छह चरण सिखाकर ग्रामीणों को किया जागरूक ।

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         प्रहलाद गजभिये ( जिला ब्युरो बालाघाट)
बालाघाट
बारिश के मौसम में डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर आया है। जिले में संचालित 'डायरिया रोको अभियान' के तहत वारासिवनी विकासखंड के ग्राम कौलीवाड़ा एवं कटंगटोला में विशेष जागरूकता अभियान चलाकर पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच की गई तथा ग्रामीणों को स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल का महत्व समझाया गया।
कार्यपालन यंत्री बी.एल. उइके के निर्देशन में पीएचई विभाग की टीम ने ग्राम पंचायत, आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों का भ्रमण किया। अभियान के दौरान पीएमयू समन्वयक शीतल मिश्रा एवं हरीश झा, ब्लॉक समन्वयक प्रतांशी पाठक तथा आईएसए फील्ड समन्वयक शुभम सहारे, फनीश रंगारे और रानी सिंह राजपूत ने ग्रामीणों, शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों को जलजनित बीमारियों से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए।
👉       एफटीके किट से मौके पर हुई पानी की जांच
अभियान के दौरान फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) की सहायता से गांवों के पेयजल स्रोतों की रासायनिक गुणवत्ता की जांच की गई। इतना ही नहीं, ग्रामीणों को स्वयं एफटीके किट का उपयोग करना भी सिखाया गया, ताकि वे समय रहते दूषित पानी की पहचान कर सुरक्षित पेयजल का उपयोग कर सकें।
' 👉     साफ हाथ–स्वस्थ जीवन' का दिया संदेश
टीम ने आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में हाथ धोने के छह वैज्ञानिक चरणों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि भोजन बनाने और खाने से पहले तथा शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डायरिया सहित कई गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।
👉    स्वच्छ पानी और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा                                  बचाव
पीएचई विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हमेशा स्वच्छ, शुद्ध और ढका हुआ पानी ही उपयोग करें तथा जल स्रोतों के आसपास नियमित साफ-सफाई बनाए रखें। विभाग ने कहा कि जनजागरूकता, सुरक्षित पेयजल और व्यक्तिगत स्वच्छता को अपनाकर ही डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
          👉    अभयवाणी की राय     👈
डायरिया जैसी बीमारियों से बचाव केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जब हर नागरिक स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएगा, तभी स्वस्थ समाज का निर्माण होगा। पीएचई विभाग का यह अभियान जनभागीदारी के साथ और अधिक प्रभावी बन सकता है।
       अभयवाणी समाचार पत्र
                 बालाघाट
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