नरसिंहपुर- जिला प्रशासन के नो एंट्री के आदेश से एक तरफ जहां वैद्य परिवहन कर्ता, डम्फर, ट्रक, ट्रैक्टर ट्राली वाहन मालिकों को परेशानी हो रही है वही आम जनता भी इससे परेशान हो रही है।
कलेक्टर के नो एंटी के आदेश के रेत और गिट्टी और अन्य बस्तुओ के कारोबार में आई भारी मंदी, रेत, गिट्टी अन्य निर्माण सामग्रियों के मूल्यों मे आ सकता हैं भारी उछाल
स्टेट हाईवे क्रमांक 22 (गाडरवारा से पिपरिया से हाईवे क्रमांक 44 (गाडरवारा से उदयपुरा मार्ग) पर भारी वाहनों के आवागमन हेतु प्रातः 7:00 रात्रि 9:00 बजे तक नो एंट्री लागू की गई है, रेत, गिट्टी, एम. सेण्ड, मुरम्, कोपरा णि सामग्री के वैध परिवहनकर्ता डंपर / ट्रक संचालक एवं वाहन मालिक जिला नरसिंहपुर, दमोह, रायसेन, भोपाल, विदिशा, अशोकनगर, जबलपुर आदि के वाहन मालिको ने बड़ी संख्या कलेक्ट्रेट नरसिंहपुर आकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया है जिसमें कहा गया है कि सर्वप्रथम हम आपके द्वारा जनसुरक्षा, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं यातायात व्यवस्था रखने के उद्देश्य से जारी आदेश का पूर्ण सम्मान एवं समर्थन करते हैं। प्रशासन द्वारा पीडिंग तथा बिना तिरपाल के खनिज परिवहन पर नियंत्रण हेतु उठाए गए कदम निश्चित रूप पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत सराहनीय हैं।
किन्तु उक्त आदेश के अंतर्गत स्टेट हाईवे क्रमांक 22 (गाडरवारा से पिपरिया मार्ग) , (गाडरवारा से उदयपुरा मार्ग) पर भारी वाहनों के आवागमन हेतु प्रातः 07:00 बजे से लगातार 14 घंटे भारी वाहनों के आवागमन पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के कारण गिट्टी नरसिंहपुर जिले में 70% गाडरवारा करेली पिपरिया सालीचौका सहित अनेज जगह सागर क्षेत्र से आती है जोकि सस्ती और मजबूत होती है जिसके कारण उसका उपयोग सर्वाधिक जिले मे होता है,
वहीं अन्य सामान भी इन क्षेत्रों में सागर जिले से ज्यादातर मात्रा में आता हैं,
अगर इसी तरह 14 घंटे नो एंट्री रहती है, तो वाहन के भाड़ो मे वृद्धि होना लाजमी है क्योंकि जब एक दिन की जगह 2 दिन में समान खाली होगा,एवं रात में खाली करने बाली लेवर उपलब्ध नहीं होती है,
जिसके कारण व्यापार में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं,
इसी कारण व्यापारी और वाहन मालिक दोनों नोएंट्री के कारण परेशानी का सामना कर रहे हैं, गिट्टी वाले ट्रको की रॉयल्टी की कंडीशन अलग से है, जिसके कारण वाहन मालिकों पर अब रोजी-रोटी का खतरा मंडरा रहा है अगर यूं ही नो एंट्री चालू रहती है तो विवश होकर वाहन मालिकों को धरना प्रदर्शन करने मजबूर होना पडेगा जिसकी जबावदेही शासन प्रशासन की होगी
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