डीएसआर तकनीक से धान की सीधी बुवाई का प्रदर्शन, खेत बचाओ अभियान के तहत लगी कृषक चौपाल ।बीजामृत उपचारित बीजों की सुपर सीडर से बुवाई, किसानों को प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक खेती के गुर सिखाए गए।

बालाघाट
कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक, टिकाऊ एवं कम लागत वाली खेती की तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 6 जून 2026 को विकासखंड के ग्राम चिल्लौद में कृषक श्रीमती संध्या भुतेकर के खेत पर डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती की महत्वपूर्ण तकनीक बीजामृत से उपचारित धान बीजों की उन्नत किस्म जेआर-81 की बुवाई सुपर सीडर मशीन के माध्यम से हरी खाद फसल ढैंचा के साथ एक एकड़ भूमि में की गई।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि डीएसआर तकनीक धान उत्पादन की एक उन्नत एवं जल संरक्षण आधारित पद्धति है, जिससे श्रम, समय और उत्पादन लागत में कमी आती है। साथ ही फसल की उत्पादकता बढ़ने के साथ किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
     👉     ढैंचा बढ़ाएगा भूमि की उर्वरा शक्ति
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कार्यक्रम में कृषि अधिकारियों ने बताया कि धान के साथ ढैंचा की बुवाई करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। ढैंचा एक उत्कृष्ट हरी खाद फसल है, जो भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि कर रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाती है।
  👉     चांगोटोला में आयोजित हुई कृषक चौपाल
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इसी दिन खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत ग्राम चांगोटोला में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की। चौपाल में कृषि विशेषज्ञों द्वारा नरवाई प्रबंधन, डीएसआर तकनीक, हरी खाद के रूप में ढैंचा के उपयोग, खरपतवार नियंत्रण तथा एजोला के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई।
किसानों को बताया गया कि फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका वैज्ञानिक प्रबंधन करना चाहिए, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। वहीं एजोला को जैविक नाइट्रोजन का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए इसके उपयोग से धान उत्पादन में वृद्धि की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
👉     किसानों ने दिखाई नई तकनीकों को अपनाने में                             रुचि
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चौपाल में उपस्थित किसानों ने कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना की और प्राकृतिक व वैज्ञानिक खेती की नवीन तकनीकों को अपनाने की इच्छा व्यक्त की। कृषि विभाग ने किसानों से लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
 👉  कृषि विभाग के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को लाभकारी, पर्यावरण-अनुकूल और स्थायी कृषि तकनीकों से जोड़कर कृषि क्षेत्र के समग्र विकास एवं किसानों की आय वृद्धि की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
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