जिला चिकित्सालय बालाघाट के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता, आधुनिक उपचार पद्धति और निरंतर देखभाल से गंभीर स्थिति में भर्ती दो नवजात बालिकाओं को नया जीवन मिला है।सफल उपचार के बाद दोनों शिशुओं को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया, जिससे परिजनों में खुशी का माहौल है। परिवारों ने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप एवं सिविल सर्जन डॉ. नीलय जैन ने बताया कि जिला सिवनी के ग्राम बागडोंगरी निवासी रीना डांडेकर ने 25 अप्रैल 2026 को बालाघाट के एक निजी अस्पताल में सिजेरियन प्रसव से बालिका को जन्म दिया था। जन्म के दूसरे दिन शिशु को सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगी, जिसके बाद उसे जिला चिकित्सालय बालाघाट के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया।
शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने तत्काल उसे CPAP मशीन पर रखा, लेकिन ऑक्सीजन स्तर नियंत्रित नहीं होने पर वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी, एंटीबायोटिक उपचार और सतत देखभाल से तीन दिनों के भीतर शिशु की स्थिति में सुधार होने लगा। इसके बाद उसे पुनः CPAP एवं ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। उपचार के दौरान मां का दूध नली के माध्यम से दिया गया तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार KMC (कंगारू मदर केयर) एवं NNS भी कराया गया। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद 9 मई 2026 को 14 दिन की आयु एवं 2.130 किलोग्राम वजन पर शिशु को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया।इसी प्रकार बालाघाट जिले की बिरसा तहसील अंतर्गत ग्राम बजांरी टोला निवासी सपना मराठे ने 25 अप्रैल 2026 को पीएचसी मोहगांव में सामान्य प्रसव द्वारा बालिका को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद शिशु के नहीं रोने और लगातार झटके आने की स्थिति के कारण उसे उसी रात जिला चिकित्सालय बालाघाट के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया।
भर्ती के समय शिशु को सांस लेने में कठिनाई के साथ बार-बार झटके आ रहे थे। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार प्रारंभ करते हुए झटकों को नियंत्रित करने के लिए विशेष दवाइयों एवं मिडास इन्फ्यूजन ड्रिप का उपयोग किया। ऑक्सीजन स्तर कम होने पर शिशु को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। एक दिन वेंटिलेटर, एक दिन CPAP मशीन एवं लगभग 10 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखने के बाद शिशु की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।
उपचार के दौरान मां का दूध नली के माध्यम से दिया गया तथा स्वास्थ्य में सुधार होने पर स्तनपान, KMC एवं NNS कराया गया। पूर्णतः स्वस्थ होने पर 9 मई 2026 को 14 दिन की आयु एवं 2.380 किलोग्राम वजन पर शिशु को भी सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया।
एसएनसीयू के चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ के समर्पित प्रयासों से दोनों नवजात बालिकाओं को नया जीवन मिल सका। अस्पताल से छुट्टी के समय दोनों परिवारों ने भावुक होकर चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया। जिला चिकित्सालय बालाघाट की यह सफलता आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं, विशेषज्ञ उपचार और समर्पित चिकित्सा सेवाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।
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