सिवनी - चैत्र नवरात्र महोत्सव के पावन अवसर पर ज्वाला देवी मंदिर सिवनी में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिल रहा है। सिद्धपीठ के रूप में विख्यात इस मंदिर में दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।
मां आदिशक्ति की कृपा से इस वर्ष मंदिर परिसर में 225 मनोकामना ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। यह परंपरा गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जिसमें श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद माँ के चरणों में ज्योति कलश स्थापित कर आभार प्रकट करते हैं।
इन ज्योति कलशों की विशेषता यह है कि इन्हें देश के विभिन्न राज्यों और शहरों के श्रद्धालुओं द्वारा स्थापित किया गया है। इनमें अरुणाचल प्रदेश, सिकंदराबाद(तेलंगाना), पंजाब, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़), हिसार (हरियाणा), मुंबई(महाराष्ट्र), नागपुर, पुणे, भोपाल, नई दिल्ली, उज्जैन, इंदौर, सागर, जबलपुर, मंडला, बालाघाट सहित अन्य स्थान शामिल हैं। यह दर्शाता है कि माँ ज्वाला देवी के प्रति आस्था देशभर में व्यापक रूप से फैली हुई है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, नवचंडी पाठ, हवन एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर आचार्य अजय शास्त्री द्वारा नवचंडी पाठ संपन्न कराया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
अष्टमी (26 मार्च) को शाम 5 बजे पूजन एवं हवन कार्यक्रम आयोजित होगा, जबकि नवमी (27 मार्च) को दोपहर 2 बजे पूजन किया जाएगा। दोपहर 3 बजे मौन आसन का आयोजन होगा, जिसमें पुजारी जी द्वारा भक्तों को मनोकामना पूर्ति हेतु विशेष भेंट प्रदान की जाएगी। इसके पश्चात पुजारी जी द्वारा सवा किलो जलते हुए खप्पर के साथ हवन कुंड की परिक्रमा की जाएगी, जो इस मंदिर की विशेष धार्मिक परंपरा मानी जाती है।
इसी क्रम में शाम 5 बजे मंदिर परिसर से भव्य कलश विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान कलश स्थापित करने वाली माताओं-बहनों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया जाएगा।
सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहाँ श्रद्धालु माँ ज्वाला देवी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। सिवनी जिला सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से श्रद्धालु लगातार यहां पहुंच रहे हैं।
मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही है।
ज्वाला देवी मंदिर आज पूरे क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ के चरणों में नतमस्तक हो रहे हैं।
इस मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहाँ बीते 132 शनिवारों से निरंतर हर शनिवार सुंदरकांड का पाठ किया जा रहा है, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बन चुका है। हर सप्ताह बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
