उन्होंने कहा है कि मध्यान्ह भोजन योजना तथा महिला-बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में रोटी बनाने की मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया प्रशासनिक कारणों से अब तक पूरी नहीं हो सकी है, जिसका सीधा असर बच्चों के भोजन पर पड़ रहा है।
जारी बयान में किशोर समरीते ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में रोटी मशीनें लगाने के लिये टेंडर जारी किये गये थे। इसी क्रम में बालाघाट जिले में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा दो बार टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की गई, किंतु दोनों ही बार कलेक्टर बालाघाट द्वारा टेंडर निरस्त कर दिये गये।
| पूर्व विधायक किशोर समरीते |
उन्होंने आरोप लगाया कि पहली टेंडर प्रक्रिया में शर्त यह रखी गई थी कि आपूर्तिकर्ता के पास कम से कम 35 रोटी मशीनें विक्रय करने का अनुभव होना चाहिए, जिसे कोई भी आपूर्तिकर्ता पूरा नहीं कर सका। वहीं दूसरी टेंडर प्रक्रिया में टेंडर स्वीकृति समिति के एक सदस्य जिला कोषालय अधिकारी द्वारा आटे की लोई बनाने वाली मशीन को रोटी बनाने की मशीन के रूप में प्रस्तुत किये जाने का प्रयास किया गया, जिससे कलेक्टर को गुमराह किया गया।
किशोर समरीते के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया का असर बालाघाट जिले के मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों तथा छात्रावासों में बच्चों को रोटी के स्थान पर भात परोसा जा रहा है, जबकि शिक्षा सत्र समाप्त होने में अब केवल दो माह का समय शेष है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भात के लिये उपलब्ध कराए जा रहे चावल की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की है।
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि ऐसी ही स्थिति जिला अस्पताल सहित तहसील स्तर पर संचालित सिविल अस्पतालों में भी देखने को मिल रही है। उन्होंने इसे प्रदेश-स्तरीय समस्या बताते हुए कहा कि बच्चों के पोषण से जुड़ा यह विषय गंभीर चिंता का विषय है।
किशोर समरीते ने झारखंड की भूख से मौत की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में बच्चों के भोजन से जुड़ा कोई भी मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
(यह संदर्भ उन्होंने उदाहरण के तौर पर दिया।)
इस संबंध में बालाघाट जिला प्रशासन से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
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