मानवता की मिसाल - बालाघाट में शव वाहन सेवा से सैकड़ों परिवारों को राहत

बालाघाट
 जिले में दुर्घटना अथवा अन्य कारणों से शासकीय अस्पतालों में उपचार के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में मृतकों के पार्थिव शरीर को निःशुल्क शासकीय शव वाहन के माध्यम से ससम्मान उनके गृह निवास तक पहुंचाया जा रहा है। इस संवेदनशील पहल से जिले की विभिन्न तहसीलों के सैकड़ों शोकाकुल परिवारों को राहत मिल रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मानवीय पहल पर मध्यप्रदेश में शुरू की गई इस योजना के तहत गरीब, कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में आर्थिक एवं मानसिक सहारा मिल रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह व्यवस्था शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में संजीवनी 108 आपातकालीन सेवा, जननी एक्सप्रेस 108 तथा निःशुल्क शासकीय शव वाहन के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने बताया कि अगस्त 2025 में योजना लागू होने से लेकर जनवरी 2026 तक कुल 220 पार्थिव शरीरों को निःशुल्क उनके घरों तक पहुंचाया गया। माहवार आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में 35, सितंबर में 39, अक्टूबर में 29, नवंबर में 32, दिसंबर में 43 तथा जनवरी 2026 में 42 पार्थिव शरीरों को ससम्मान गृह निवास तक पहुंचाया गया।
संजीवनी-108, जननी एक्सप्रेस एवं निःशुल्क शव वाहन सेवा के जिला प्रबंधक शुभम लिल्हारे एवं डॉ. गौरी शंकर पटले ने आमजन से अपील की है कि शासन की इस संवेदनशील सुविधा की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि जरूरतमंद परिवार अपने परिजन के पार्थिव शरीर को अंतिम समय में ससम्मान घर ला सकें।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस सेवा से न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिली है, बल्कि अंतिम यात्रा की प्रक्रिया को भी गरिमापूर्ण बनाया जा सका है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि आवश्यकता पड़ने पर इस निःशुल्क सुविधा का लाभ अवश्य उठाएं।
उल्लेखनीय है कि अब शासकीय अस्पतालों में उपचार के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को पार्थिव शरीर घर ले जाने के लिए आर्थिक चिंता नहीं करनी पड़ती। प्रदेश के जिला अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शव वाहन तैनात किए गए हैं। यह सेवा सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे उपलब्ध है।

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