बालाघाट
कलेक्टर श्री मृणाल मीना एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती दीपमाला मंगोदिया के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बैहर परियोजना अंतर्गत कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत चिन्हित कुपोषित बच्चों को पोषण युक्त फूड बॉस्केट प्रदान किए जा रहेहैं तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी श्री आर.एन. धुर्वे ने जानकारी देते हुए बताया किपरियोजना स्तर पर तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार सेक्टर पर्यवेक्षकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक कार्यकर्ता द्वारा अपने क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को “गोद” लेकर उनके पोषण स्तर में सुधार के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है। इस दौरान बच्चों के परिवारों को विभाग द्वारा तैयार फूड बॉस्केट वितरित किए जा रहे हैं, जिनमें दाल, चावल, पोषक अनाज, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ एवं अन्य आवश्यक पोषण सामग्री शामिल की गई है।
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गृह भ्रमण भी है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों के लिए संतुलित आहार, स्वच्छता, स्तनपान, पूरक आहार की सही विधि तथा मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों के संबंध में जागरूक कर रहे हैं। उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि केवल खाद्यान्न उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही समय पर, सही मात्रा में और संतुलित भोजन देना भी उतना ही आवश्यक है।
कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी के लिए विकासखंड चिकित्सा अधिकारी बैहर द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अमले को निर्देशित किया गया है कि उन 10 चिन्हित क्षेत्रों में, जहां कुपोषण का प्रतिशत अधिक पाया गया है, तिथिवार स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएं। इन शिविरों में बच्चों का वजन, ऊंचाई एवं मध्य भुजा परिधि (MUAC) मापन किया जा रहा है, जिससे उनके पोषण स्तर का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके। आवश्यकतानुसार बच्चों को दवाइयां, आयरन एवं फोलिक एसिड, विटामिन सप्लीमेंट तथा चिकित्सकीय परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है।
गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें विशेष उपचार और पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में रेफर करने की भी व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में बेहतर उपचार मिल सके। विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा उपचार और पोषण सहायता से वंचित न रहे।
महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से यह अभियान केवल राहत वितरण तक सीमित न रहकर व्यवहार परिवर्तन की दिशा में भी कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ना, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना तथा उन्हें सामान्य पोषण स्तर तक लाकर स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर करना है।
जिला प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि वे अपने आसपास यदि किसी कुपोषित बच्चे की जानकारी पाते हैं तो तत्काल आंगनवाड़ी केंद्र या महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस दिशा में सतत एवं योजनाबद्ध प्रयास जारी हैं, जिससे बैहर परियोजना क्षेत्र को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर ठोस प्रगति सुनिश्चित की जा सके।